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जागरण वार्तालाप में लेखकों और प्रकाशकों ने किया पहल का स्वागत

नयी दिल्ली। राजधानी स्थित ऑक्सफ़ोर्ड बुकस्टोर में हिंदी साहित्य जगत से जुड़े नामी लेखकों एवं प्रकाशकों का जमावड़ा लगा। मौका था, ‘जागरण वार्तालाप’ में दैनिक जागरण हिंदी बेस्टसेलर की पहल पर परिचर्चा का। कार्यक्रम में वरिष्ठ लेखिका मैत्रयी पुष्पा, उपन्यासकार विवेक मिश्रा, सामायिक प्रकाशन के महेश भारद्वाज, हिंदी युग्म के शैलेश भारतवासी के अलावा हिंदी साहित्य से जुड़े कई नामचीन व्यक्तियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन सुश्री राखी बक्शी ने किया। दैनिक जागरण पहली बार हिंदी में बेस्टसेलर की अवधारणा को लेकर आ रहा है और आगामी 23 अगस्त को कथा, कथेतर और अनुवाद श्रेणियों में बेस्टसेलर पुस्तकों की घोषणा करेगा।
वर्ष की हर तिमाही में दैनिक जागरण नीलसन बुकस्कैन बेस्टसेलर पुस्तकों की सूची जारी करेगा। इस सूची में केवल उन्हीं किताबों को शामिल किया गया है जिनका पहला संस्करण 1 जनवरी 2011 या उसके बाद प्रकाशित हुआ है।
कौन सी पुस्तक बेस्ट सेलर हो, किसी पुस्तक की ज़्यादा बिक्री का प्रमाण क्या है, सूची में किन शैलियों की पुस्तकें शामिल हों। इन प्रश्नों से हिंदी साहित्यिक समाज अब तक जूझता रहा है। दैनिक जागरण द्वारा की गयी इस पहल का जहाँ एक तरफ पाठकों को पुस्तक चुनाव में इसका फ़ायदा मिलेगा, वहीँ प्रकाशकों ने भी इस कदम का भरपूर स्वागत किया है।


वरिष्ठ लेखिका मैत्रेयी पुष्पा ने कहा, "बेस्ट सेलर के नाम पर बाज़ार ने यह झूठ बना रखा है कि गांव और कस्बों में भी अंग्रेज़ी की किताबें बिक रही हैं। वहां का पाठक वर्ग आज भी हिंदी की पुस्तक ही पढ़ता है। एक लेखक को बने रहने के लिए बाज़ार के बहाव में कतई नहीं बहना चाहिऐ। हिंदी की कई किताबें बेस्टसेलर हैं, शहर के बाहर ¨हिंदी की किताबें बिक रही हैं। महिलाएं और युवा इन किताबों के पाठक हैं। हिंदी में विषय समय के अनुसार बदल रहे हैं, लेकिन साधन से मनुष्य की भावनाएं नहीं बदल जाती हैं।’’
कार्यक्रम में सम्मिलित उपन्यासकार विवेक मिश्रा ने कहा, "बाज़ार की एक अपनी पसंद होती है और वह हमेशा अपनी पसंद की चीज़ को खपाने की पूरी कोशिश करता है। कई बार बेस्ट सेलर के नाम पर पाठकों के साथ बस धोखा होता है। साहित्य बाज़ार का हिस्सा ज़रूर है पर इसका मकसद बाकि बाज़ारू चिज़ों से अलग है। इसका मकसद आवाज़ उठाना है, न कि किसी स्पर्धा का हिस्सा बनना। आज की स्थिति में किसी भी रचना से यदि सरोकार निकाल दें और उसमें थोड़ा झूठ मिला दें तो वह बेस्टसेलर हो सकती है।"
हिन्द युग्म प्रकाशन के शैलेश भारतवासी ने कहा, "दैनिक जागरण हिंदी बेस्ट सेलर आने से किताब की लोकप्रियता का सही आंकलन हो सकेगा। साथ ही लोगों तक यह बात पहुँचेगी की अभी भी हिंदी में ऐसी किताबें आ रही हैं जो लोकप्रिय हो रही हैं।"
सामयिक प्रकाशन के निदेशक महेश भारद्वाज ने कहा कि “पश्चिमी देशों की तर्ज पर ¨हिंदी में बेस्टसेलर खोजना स्वागत योग्य कदम है। हिंदी प्रकाशक अंग्रेजी के मुकाबले सस्ती किताबें छापते हैं। हिंदी में उपन्यास और स्त्री विमर्श की मांग सबसे अधिक है। किताबों के प्रचार-प्रसार के लिए लेखक और प्रकाशक को कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहिए।”

दैनिक जागरण हिंदी बेस्टसेलर के बारे में :

दैनिक जागरण हिंदी बेस्टसेलर एक अभिनव प्रयोग है, क्योंकि अभी तक हिंदी के बेस्टसेलर की अवधारणा की शुरुआत नहीं हो सकी है। साथ ही हिंदी की पुस्तकों की लोकप्रियता एवं बिक्री के बारे में जानकारी का अब तक कोई स्वतंत्र एवं प्रामाणिक तंत्र नहीं है।
दैनिक जागरण नीलसन बुकस्कैन के द्वारा बेस्टसेलर सूची इसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है। हिंदी साहित्य के बाज़ार को इस प्रयास द्वारा निश्चित तौर पर विकसित होने की संभावना मिलेगी।
वर्ष की हर तिमाही में दैनिक जागरण नीलसन बुकस्कैन द्वारा बेस्टसेलर पुस्तकों की सूची जारी की जायेगी। बेस्टसेलर की यह सूची तीन श्रेणियों में होगी- कथा, कथेतर और अनुवाद। दैनिक जागरण नीलसन बुकस्कैन बेस्टसेलर में उन्हीं किताबों को शामिल किया गया है जिन का पहला संस्करण 1 जनवरी, 2011 या उसके बाद प्रकाशित हुआ है।


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मेहरानगढ़ दुर्ग में एक बार फिर गुंजेगी भारत व विश्वभर के संगीत के स्वर लहरियां

नई दिल्ली। शरद पूर्णिमा के चांद की चांदनी जों की इस समय वर्ष में सबसे प्रखर होती है और इस चांदनी छटा में जोधपुर का ऐतिहासिक मेहरानगढ़ दुर्ग एक बार फिर से दमक उठेगा। जब वहां 5 से 9 अक्टूबर के बीच होने वाले राजस्थान अंतर्राष्ट्रीय लोक उत्सव जोधपुर रिफ 2017 के तहत भारत व विश्व भर से आये संगीतकार अपने सुरों का जादू बिखेरेंगे। दिल को छू जाने वाले संगीत और अपने खुशनुमा माहौल के लिए प्रसिद्ध रिफ में जब राजस्थानी लोकसंगीत के साथ विश्व भर की कई संगीत शैलियों की स्वर लहरियां गूंजेंगी तो एक अदभुत ही समा बंधेगा।
पिछले 10 वर्षों से, जोधपुर रिफ कलाकारों और संगीत प्रेमियों के मन को लुभाता आ रहा है। राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी जोधपुर के अनुठे और आकर्षक वातावरण के बीच, मेहरानगढ़ किले में बहुत ही अनोखे रुप में यह उत्सव आयोजित होता है। यहां आयोजित आर्कषक क्रार्यक्रमों और बहुत ही खास तौर पर की गई व्यस्थायों के चलते लोग इस कार्यक्रम में बार-बार आना पसंद करते हैं।
प्रातःकाल के शांतिपूर्ण आध्यात्मिक संगीत सत्रों से लेकर देर रात्रि तक चलने वाले नृत्य व संगीत के कार्यक्रम लोगों के मन को संगीतमयी कर देते हैं। यह एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय मंच है, जहां परंपरागत लोकसंगीत की प्रस्तुतियां एक नवीन अनुभव प्रदान करती हैं। इस उत्सव में लगभग 350 राजस्थानी व अंतरराष्ट्रीय संगीतकार भाग लेंगे।
जोधपुर रिफ दुर्लभ राजस्थानी और अंतरराष्ट्रीय कलाओ का लुत्फ उठाने का एक शानदार अवसर है, जहां महान कलाकारों से मिलने और बातचीत करने के अवसर के साथ-साथ, युवा पीढ़ी को हमारी समृद्ध विरासत से रूबरू होने का मौका भी मिलता है।
जोधपुर रिफ-2017 की घोषणा करते हुए, मुख्य संरक्षक तथा मारवाड़ जोधपुर के महामहिम महाराजा गजसिंह-2 का कहना है कि, “राजस्थानी लोक संगीतकार जोधपुर रिफ के प्रमुख आकर्षण हैं। उनकी लोकसंगीत परंपराओं को लोग पसंद करते हैं और उन्हें यहां उच्च गुणवत्ता वाले अंतरराष्ट्रीय मंच का पूरा लाभ मिलता है। इसके अलावा, हम उनकी कला को भारत और दुनिया भर के कई उत्सवों में पेश करने का प्रयास भी करते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि जोधपुर रिफ को भारत में संगीत के लिए एक अग्रणी और अतिप्रिय उत्सव के रूप में जाना जाता है।”
जोधपुर रिफ संगीत प्रेमियो के लिए क्रार्यक्रमों की एक लम्बी श्रृंखला प्रस्तुत करता है, जिसमें निम्लिखित उल्लेखनीय है।
प्रातःकालीन सत्र: सुबह के शांत माहौल और जसवंत थाडा की जादुई छटा में आयोजित दिल को छू जाने वाली संगीत की प्रस्तुतियां।
राव जोधा पार्क का डेजर्ट लाउंजः सिर्फ शरद पुनम के पूरे चांद की रोशनी में मध्यरा़त्री को प्रारम्भ होकर सुबह तड़के तक चलने वाला संगीत कार्यक्रम, यहां राजस्थान के लोक कलाकारो की प्रस्तुतियां बिना किसी साउण्ड सिस्टम के होती है व चांद की प्राकृतिक रोशनी के अलावा यहां और कोई रोशनी नही होती।
रिफ रसल (RIFF Rustle) : कलाकारों  की एक ऐसी जुगलबन्दी जिसमें सभी कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति, जिसमे कलाकार कभी जोड़ी तो कभी समूह में जुगलबन्दी करते है। खास बात ये है कि इस प्रस्तुति की कलाकार कोइ पूर्व तैयारी नहीं करते फेस्टीवल हर साल किसी एक कलाकार को रसलर (Rustler) नियुक्त करता है और वो ही इस क्रार्यक्रम के लिए कलाकार चुनता है। कलाओ और कलाकारों का ये शानदार मिलन दर्शकों  को झुमने पर मजबुर कर देता है।


वार्तालाप के सत्रः इन सत्रों  मे कलाकारों से मिलने.जुलने और बातचीत करने के अलावा राजस्थान की कुछ दुर्लभ लोक कलाओं को खास विशेषज्ञों द्वारा करीबी से समझने का अवसर मिलता है।
जोधपुर रिफ  के निदेशक श्री दिव्य भाटिया ने कहा, “हालाकि हम नियमित रूप से इस उत्सव में नये तत्व जोड़ते रहते हैं, परंतु राजस्थान के संगीतकारों के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और दुनिया के कुछ बेहतरीन संगीत प्रतिभाओं को पेश करना हमारे लिए महत्वपूर्ण है। हमारा यथासंभव प्रयास यही रहता है कि क्षेत्रीय कलाकारों को अधिक से अधिक अवसर दें, ताकि उन्हें यहां अपनी धरती पर और विदेशी ज़मीन पर, दोनों ही जगह एक जैसा सम्मान और पहचान मिले। हर बार की तरह इस वर्ष भी यह उत्सव भव्य और शानदार होगा।”

उत्सव की मुख्य विशेषताएं

राजस्थान के लोक संगीतकार

निहाल खान : एक पारंपरिक मांगणियार लोक संगीतकार, जिन्हें पारम्परिक गायन शैली जांगडा महारत हासिल है।
बाबूनाथ जोगी : बाबूनाथ जोगी समुदाय से हैं, जो अपने क्षे़त्र मे जोगी समुदाय के पारम्परिक शैली के अकेले गायक हैं, वे शिव, गोपीचंद, भरतहरी और अन्य लोक नायकों के साथ.साथ कबीर, सूरदास व गोरखनाथ के वाणी, भजन तथा कथाएं जोगिया सारंगी पर गाते हैं।
भीखा खान : 74, वर्षीय भीखाजी खामीज, सुहब, सौरठ, भैरवी, तोड़ी, बिलावल, मेघमल्हार और जोग जैसी प्राचीन लोक रागों के जानकार व मंगाणियार समुदाय के एक वरिष्ठ कलाकार हैं जो कि अपनी परम्परागत लोक प्रस्तुतियों के लिए प्रसिद्ध हैं।
घेवर खान व धरा खान : कमायचा जैसे र्दुलभ वाद्य को बजाने वाले कुछ ही ऐसे कलाकार अब शेष रहे हैं। घेवर खान और धरा खान जो कमायचा के महान कलाकार पदम श्री साकर जी के पुत्र है, इन दोनो भाईयो ने इस दुर्लभ साज और पिता की विरासत को आज भी सहेज कर रखा है। रिफ मे ये कुछ युवा कलाकारो के साथ इस अनूठे वाद्ययत्र पर रेगिस्तानी संगीत के सुरो के जादु को बिखेरेंगे। इनके अलावा लगभग कुल 250 राजस्थानी लोक कलाकार इस साल रिफ में शामिल होगें।


पैको रेंटेरिया (भारत मे पहली बार) : जेलिस्को(मेक्सिकन राज्य) कि धरती जिसने विश्व को महान गिटारिस्ट कार्लोस सैंटाना, मारिआची संगीत और टकीला दिये है इसी जेलिस्को से हमें एक और कला प्रवीण गिटारिस्ट मिले हैं। पैको रेन्टेरिया के रूप में। जिप्सी फ्लेमैंको और प्रगतिशील जैज बीट्स में महारत के साथ लेटिनो जुनून को व्यक्त करते हुए, पैको ने कार्लोस सैंटाना और लुसियानो पवारोटि जैसे कलाकारों के साथ प्रदर्शन किया है। लॉस लोबोस और एंटोनियो बैन्डेरास द्वारा लिखित और अभिनीत गीत के साथ उनकी मूल रचना एल मारियाची, चर्चित फिल्म डेसपेराडो का मुख्य गीत था।
2002 के लैटिन ग्रेमी नॉमिनेटेड कलाकार, इनका स्टीवन स्पीलबर्ग के स्टूडियो ने अपनी एक फिल्म। द लेजेंड ऑफ जोरो में प्रयोग हेतु साउंडट्रैक निर्माण के लिए चयन किया था।
जोधपुर रिफ व स्प्री फेस्टीवल (स्काटलैण्ड) की साँझा पेशकश (भारत मे पहली बार) : (यूके-भारत संस्कृति वर्ष 2017 के तहत) जोधपुर रिफ में दोनो देशों की कलाओ के मिलाप व मित्रता के तौर पर 6 अक्टूबर जोधपुर मे और स्प्री फेस्टीवल में (पैश्जली, स्काटलैण्ड 13 अक्टूबर) प्रस्तुत होंगी।
इसमे रॅास एन्स्ली, जिन्हे बीबीसी-2 द्वारा काफी सराहना मिली है और इन्हे 2017 के श्रेष्ठ युगल लोक कलाकार (रॅास एन्स्ली व अली हटन) रुप में चुना गया है। ये यहां कुछ खास भारतीय कलाकारो के साथ संगत करेगें।
शूगलनिफ्टी और धुनधोरा (दि हाई रोड टु जोधपुर एल्बम का इंडिया प्रीमियर) : हजारों मीलों की जमीनी दूरी के बावजुद इन दोनों समहों में बहुत कुछ एक समान है। दोनों ने लगभग चार वर्षों तक एक साथ काम किया है और अब इनका गठबंधन पहले से कहीं अधिक मजबूत हैं। शूगलनिफ्टी और धुनधोरा को सुनकर कोई भी झूमे बिना नहीं रह पाता है। दो कम बोली जाने वाली भाषाओं गेलिक और मारवाड़ी में गाते हुए भी ये संगीत की एक ही भाषा में संवाद करते हैं। इस राजस्थानी-स्कोटीश जोड़ी के काम को स्कॉटलैंड और भारत में रिकॉर्ड किया जाएगा और फिल्माया जाएगा। इनका यह एलबम 2018 की शुरुआत में रिलीज के लिए तैयार होगा।
वेल्श कहानीकार और भारतीय रहस्यमय संगीत के साथ राउंड हाउस सत्र : जोधपुर रिफ में एक इस बार एक राउंडहाउस सत्र होगा, जिसमें वेल्श और भारतीय भाषाओं की एक संगीत श्रृंखला में कहानियां प्रस्तुत होंगी। यह जुगलबंदी अद्वितीय है, क्योंकि इसमें तीन उत्सवों का मेल है। फेस्टिवल ऑफ वॉयस, बियोंड दि बॉर्डर तथा जोधपुर रिफ।
सिलामंका और रुबेनमशांगवा : असाधारण रूप से प्रतिभाशाली, मणिपुरी की गायक सिलामंका अपनी प्रतिभा कौशल को जोधपुर रिफ में प्रस्तुत करेगी । वे मोरंग साई और बसोक की दुर्लभ परंपराओं को अपने ग्रुप लाइहुई के साथ पेश करेंगी। नागा ब्लूज के जनक  रुबेनमशांगवा एक नए तालमेल के साथ जोधपुर रिफ मंच पर मिलेंगे।

राजस्थान के आदिवासी भीलों से मिलिये : 

दक्षिणी राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के भील मध्य भारत की जनजातियों से जुडे़ हुए हैं। उनके पारंपरिक संगीत में गाथा (कथा गीत), लोरी, भक्ति, अनुष्ठान गीत और प्रेम गीत प्रमुख हैं। वे द्विपदी (दो पंक्तियों के), त्रिपदी (तीन पंक्तिद्ध और चतुस्पदी) चार पंक्तिद्ध के गीत जो मुलरुप से वेदिक संगीत से जुड़े है जिन्हे ये अपनी आदि शैली में गाते हैं, जो तालबद्ध होती है। वे अपनी प्रस्तुतियों में ढोल, कौड़ी, थाली, घुंगरू, कुंडरू, तंबूरा और घुमेरा नृत्य का प्रयोग करते हैं।
क्लब मेहरान में बिक्सिगा 70 : बिक्सिगा 70, ब्राजील को सबसे चर्चित एफ़रोबीट डांस संगीत बैंड है। ये प्रतिभाशाली संगीतकार ब्राज़ीलियाई और अफ्रीकी संगीत से प्रेरित समकालीन संगीत  की रचना करते है, जिसमे सांबा और रेगे का प्रभाव व थोड़ा इलैक्ट्रॉनिका, कारिंबो और एथियो जैज का मिश्रण हैं। यह डांस शौकिनो के प्लेलिस्ट का ज़रूरी हिस्सा हो सकता है।
निकोटीन स्विंग का जैज मनोशे : भारत मे पहली बार युवा जिप्सी जैज मास्टर निकोटीन स्विंग की धुनें ताजा और कातिलाना है। वे अमेरिकी स्विंग को जिप्सी स्ट्रिंग लय के साथ मिलाकर 30 के दशक का 'मनोशे' (जिप्सी जैज) पेश करते हैं।
बुकिंग : फेस्टिवल के टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग 22 अगस्त 2017 से शुरू हो जाएगी।
वेबसाइट: www.jodhpurriff.org
पहले आने वालों को 15 प्रतिशत की प्रारंभिक छूट 12 सितंबर 2017 तक उपलब्ध रहेगी।
जोधपुर रिफ  2017 के बारे में अधिक जानकारी के लिए इसके फेसबुक पेज पर जाएं : www.facebook.com/JodhpurRIFF/


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नई दिल्ली : 9 अगस्त क्रान्ति दिवस पर पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुख़र्जी द्वारा महान स्वतंत्रता सेनानी, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद (1952-1977) श्री बिश्वनाथ राय पर संकलित “राष्ट्र निर्माण में बिश्वनाथ राय, महान स्वतंत्रता सेनानी का संसद में योगदान” पुस्तक का विमोचन दिल्ली में कन्सिसटूशन क्लब  किया गया.स्व० श्री बिश्वनाथ राय कृषक एवं कृषि मजदूरों के हित के ध्वजवाहक के रूप में संसद में सर्वाधिक मुखर रहे। उनके द्रश्टक प्रश्नोत्तरों ने तत्कालीन कृषि एवं कृषक लाभप्रद पंचवर्षीय योजनाओं के निर्माण एवं अनुपालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।



इस समारोह में विशिष्ट अतिथि श्री मनोज सिन्हा (मंत्री), श्री भूपेन्द्र सिंह हूडा (विधायक एवं पूर्व मुख्यमंत्री), श्री रविन्द्र कुशवाहा (सांसद), श्री भगत सिंह कोशियारी (सांसद),  कर्नल सोनाराम चौधरी (सांसद), श्री प्रदीप टम्टा (सांसद), महाबल मिश्रा (पूर्व सांसद), कमलेश शुक्ल विधायक उपस्थित थे। कार्यक्रम में भारतीय सेना के अधिकारी, पूर्व सैनिक, किसान, किसान संगठनों के प्रमुख, स्वतंत्रता सेनानी के उत्तराधिकारी, वैज्ञानिक एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्ध जन उपस्थित थे। श्री राय के सुपुत्र कर्नल प्रमोद शर्मा ने मुख्य अतिथि का सम्मान किया एवं पुस्तक की विषय वस्तु का संक्षिप्त विवरण दिया।
इस मौके पर पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुख़र्जी ने कहा कि बिश्वनाथ राय जी ने सिर्फ स्वंतत्रा सग्राम में ही भाग नहीं लिया बल्कि स्वंतत्रा के बाद देश के निर्माण में भी अभूतपूर्व योगदान दिया, मेरा सौभाग्य है कि मुझे उनके साथ काम करने का अवसर मिला।
विशिष्ट अतिथि श्री मनोज सिन्हा ने कहा कि कर्नल प्रमोद शर्मा द्वारा लिखी गयी यह किताब उनके पिता को उनके द्वारा दी गयी सच्ची श्रदांजलि है।


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जिसके हाथ हमेशा दुआओं के लिए,
ईश्वर की वंदना करती हो...
जिसके रूह से मोहब्बत की,
पंखुड़ीयाँ निकलती हो...
जो खड़ा रहता है गमों में भी,
खुशी के छाये की तरह...
जिसके होठों पर,
सफलता के गीत निकलते हों...
जो मन की बात,
आँखों से पढ़ लेता हो...
जिसके ह्रद्य में प्रेम और
करूणा का संसार होता है,
वो मित्र ही तो है,
जिससे हमें सच्चा प्यार होता है।


लेखक अक्षय गौरव पत्रिका के प्रधान संपादक है अौर आप सामाजिक, साहित्यिक तथा शैक्षिक परिवेश पर लेखन करते हैं। आपसे E-Mail : asheesh_kamal@yahoo.in पर सम्पर्क किया जा सकता है।

© उपरोक्त रचना के सर्वाधिकार लेखक एवं अक्षय गौरव पत्रिका पत्रिका के पास सुरक्षित है।


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आज आसमां में चिड़िया विचरती दिखी,
ऐसा लगा वो मेरे देश की है,
उसे देख आँखों में आँसू भर आया,
दर्द ऐसा छलका आँखों से,
दिल तड़प उठा घर की यादों से,
तब मस्तिष्क ने संभाला,
तब याद आया;
हूँ मैं यहाँ रोटी की चाहत में।
मेरे देश की चिड़िया दिखी
आँखों में आँसू भर आया।

जब याद वतन की आती है,
दिल तड़प कर रह जाती है,
जब वतन की एक चिड़िया,
आँखों में आँसू भर देती है,
तो अन्दाज लगा हम परदेशी का,
जो यहाँ रहते हैं, बिना माँ-बहनों के,
भूल गये हम उस हाथ की रोटी,
जिसमें माँ की ममता होती है।
मेरे देश की चिड़िया दिखी
आँखों में आँसू भर आया।

अपनी खुशीयों को,
बच्चों के संग छोड़ आया,
उस पति और पिता का भी क्या कहना,
परिवार के खातीर अपनों से दूर यहाँ तड़पता है
वो कभी हँसता तो कभी रोता है।
मेरे देश की चिड़िया दिखी
आँखों में आँसू भर आया।



इकबाल अहमद बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले है और वर्तमान में सउदी अरब के प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थान में लाईब्रेरियन के पद पर कार्यरत है। लेखक से दूरभाष 00966-591956311 एवं ई-मेल ealibrarian1972@gmail.com द्वारा संपर्क किया जा सकता है।