डा0 डी.के. पाल
मेरठ (उ0प्र0)।

योजना बनाकर सही दिशा में काम किया जाए तो सपफलता मिल ही जाती है। अपने कैरियर को संवारने के लिए तो योजना बनाकर ही आगे बढ़ना और भी जरूरी हो जाता है। आज नए-नए समाचार पत्रा, टीवी न्यूज चैनल, न्यूज वेबसाइटें आदि हमारे सामने आ रही हैं। इन सभी को अच्छे युवा जर्नलिस्टों की तलाश है।
अगर आप ने मास कम्युनिकेशन का कोर्स किया है, तो आज आपके सामने रोजगार के अच्छे अवसर मौजूद हैं। मास कम्युनिकेशन का कोर्स करके नौकरी तलाश रहे युवाओं की संख्या भी कम नहीं है। बहुत से लोग तो ऐसे हैं, जिन्हें इस पफील्ड में नौकरी मिलती ही नहीं है। मीडिया हाउस उन्हें इसलिए नहीं ले रहे हैं, क्योंकि उनके पास उन आवश्यक योग्यताओं की कमी है, जो वह चाहते हैं।
अगर आप जर्नलिज्म के क्षेत्रा में जाने का सपना देख रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि शिक्षण के लिए उस संस्थान का चयन करेंगे, जिसका लाभ आपको जाॅब हासिल करने और पिफर आगे बढने में मिल सके। यहां हम कुछ उन बिंदुओं पर बात कर रहे हैं जिन पर हर उस विद्यार्थी को ध्यान देना चाहिए, जो
इस क्षेत्र में जाकर भविष्य निर्माण करना चाहता है।

मल्टी पर्पज ट्रेनिंग
अब मीडिया के क्षेत्रा में बहुत बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है। सभी छोटे-बडे ग्रुपों को मल्टी पर्पज लोगों की आवश्यकता है। बहुत से ऐसे लोग विभिन्न ग्रुपों में काम करते मिल जाएंगे जो न केवल अच्छा लिखना, एडिट करना, समीक्षा करना जानते हैं बल्कि डिजाइनिंग, लेआउट और प्रोडक्शन से जुडे कई कामों की भी ठीक-ठाक जानकारी रखते हैं। इस बदलाव का श्रेय इस पफील्ड का प्रशिक्षण देने वाले उन अच्छे संस्थानों को जाता है, जो अपने यहां ट्रेनिंग के दौरान राइटिंग स्किल के साथ ही डिजाइनिंग, प्रोडेक्शन, मार्केटिंग आदि से संबंध्ति आवश्यक चीजों के बारे में भी जानकारी उपलब्ध् कराने का काम कर रहे हैं।
ऐसे संस्थानों से निकले बच्चे मल्टी टैलेंटेड होने के कारण जाॅब तो आसानी से हासिल कर ही लेते हैं, साथ ही नौकरी के दौरान तरक्की में भी उन्हें प्राथमिकता मिल जाती है। इंस्टीटयूट चुनने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि जो संस्थान आपकी नजर में है, वहां यह आपको हासिल हो सकता है कि नहीं।

फैकल्टी
अच्छा मार्गदर्शक अगर किसी को मिल जाता है, तो उसकी मंजिल और भी आसान हो जाती है। यह बात शत् प्रतिशत सही है। जर्नलिज्म के क्षेत्रा में संस्थान की अच्छी पफैकल्टी किसी वरदान से कम नहीं है। अगर आप इस पफील्ड में जाना चाहते हैं, तो उसी केंद्र का चयन एडमिशन के लिए करें जहां इसके अच्छे और अनुभवी शिक्षकों की उपलब्ध्ता हो।
जो आपको आध्ुनिक तकनीक के अलावा अपने अनुभवों से भी बहुत कुछ लाभ उपलब्ध् करा सकें। मीडिया सेक्टर में वरिष्ठ पत्राकारों के अनुभव भी बहुत कुछ सिखाने का काम करता है। इसका प्रशिक्षण देने वाले बहुत से ऐसे संस्थान हैं, जहां मीडिया पफील्ड में कापफी नाम कमाने वाले लोग टीचिंग स्टापफ के रूप में काम कर रहे हैं। इस तरह के संस्थान समय-समय पर जाने माने पत्राकारों को गेस्ट पफैकल्टी के रूप में अपने यहां बुलाते रहते हैं। इस तरह के संस्थान ही आपकी वरीयता सूची में रहने चाहिए।

प्रोजेक्ट वर्क

जर्नजिल्म की पफील्ड में थ्योरिकल नाॅेलेज से ज्यादा प्रैक्टिकल ज्ञान लाभ देता है। माॅस काम का प्रशिक्षण देने वाले जितने भी अच्छे संस्थान हैं, वहां इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि उनके विद्यार्थी इस पफील्ड की प्रैक्टिकल नाॅलेज से भी पूरी तरह रूबरू हों। इसके लिए वे अपने छात्रों को थोडे-थोडे समय अंतराल के बाद विभिन्न प्रकार के प्रोजेक्ट देते रहते हैं।
इन प्रोजेक्टों को पूरा करने के लिए छात्रों को पफील्ड पर जाना होता है। तरह-तरह के लोगों से मुलाकात करनी होती है। इंटरनेट या पुस्तकालय में बैठकर उस विषय की बारीकियों को खंगालना पड़ता है। इस तरह की प्रक्रिया कोर्स कर रहे लोगों में उस स्वाभाविक खोजी प्रवृत्ति को जन्म देती हैं, जो किसी पत्राकार के अंदर होना बहुत जरूरी है।
सीध्े-सादे या बेहद आसान विषयों पर दिए गए प्रोजेक्ट वर्क आपके अंदर छिपी खोजी प्रतिभा को उजागर कर सामने नहीं ला सकते हैं। इंस्टीट्यूट को चुनने से पहले यह देखना भी जरूरी है कि वहां पिछले वर्ष के छात्रों को किस तरह के प्रोजेक्ट दिए गए थे।

ट्रैक रिकार्ड
संस्थान और विद्यार्थी एक दूसरे के पूरक होते हैं। अच्छे छात्रों का लाभ संस्थानों को मिलता है, तो अच्छे संस्थानों का लाभ विद्यर्थियों को। यहां अच्छे संस्थानों का पफायदा छात्रों को अध्कि मिलता है। विद्यार्थी आज कोई भी कोर्स इस उम्मीद से करना शुरू करता है कि इसके पूरा होने के बाद उसे आसानी से जाॅब मिल जाएगा। आपकी इस आशा को पूरा करने के लिए जरूरी है कि उस संस्थान का ही चयन किया जाए, जहां का प्लेसमेंट रिकाॅर्ड अच्छा हो और वहां के विद्यार्थियों को लगातार कई वर्षो से अच्छे मीडिया हाउसों में बेहतर पगार पर नौकरियां मिल रही हों। यह ध्यान रखें कि जिन संस्थानों का पिछले कई वर्षो से प्लेसमेंट अच्छा है, वहां निश्चित रूप से गुणवत्तापूर्ण ट्रेनिंग दी जाती है। इस तरह के संस्थानों को ही बडे मीडिया ग्रुप प्लेसमेंट में वरीयता देते हैं।

लाइब्रेरी
एक पत्राकार से यह उम्मीद की जाती है कि उसके पास विभिन्न विषयों से संबंध्ति पर्याप्त जानकारी तो होगी ही। लोगों की इस उम्मीद पर खरा उतरने के लिए मीडिया जगत से जुडे लोग हमेशा नए-नए विषयों की जानकारी हासिल करते रहते हैं। इसके लिए अच्छी पुस्तकें पढते रहते हैं।
अगर आप जर्नलिज्म के क्षेत्रा में जाकर नाम करना चाहते हैं तो संस्थान चुनने से पहले यह भी सुनिश्चित कर लें कि क्या उसके पास पर्याप्त संख्या में पुस्तकों, महत्वपूर्ण समाचार पत्रों के अंकों का संग्रह है भी कि नहीं।


Axact

Akshaya Gaurav

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