अमता खान
भी हम क्रान्ति की वर्षगांठ मनाकर निपटे है। परन्तु क्या वास्तव में हमने आजादी पा ली है या सत्ता का परिवर्तन हुआ है या आम नागरिक वास्तव में अपने अपने को स्वतन्त्रा महसूस कर रहा है? आजादी के बाद आज तक ऐसे सैकड़ो प्रश्न हमारे जहन में उभर रहे है। इन प्रश्नो उत्तर को ढ़ूढ़ने की हमने कोशिश की। शायद नही? क्योकि हमारे पास आज के इस परिवेश मे इतना वक्त नही होता है। क्या हमने कभी सोचा है कि हमारे पूर्वजो ने आजादी का जो बिगुल बजाया था तथा जो सपने संजोये थे, उसके बाद उसे करके दिखाया, क्या हमने उन्हे कामयाब होने में कोई सहयोग किया है। आजादी के बाद हमारे द्वारा जो सरकार बनाई गयी क्या वो विश्वास के ध्रातल पर खरी उतरी? क्या वास्तव में हमारे पूर्वजो ने आजादी के लिए जो खून बहाया, उसका प्रतिफल आम नागरिक को मिल रहा है? क्या वास्तव में आज हम सुरक्षित है? इन सभी सवालो का जवाब शायद नही में मिलेगा। हमें यह सोचने की जरूरत है कि हमने गलती कहां की है? उसका सुधर कैसे हो सकता है। भारतीय सविधान में हमें सरकार बनाने का अधिकार दिया गया है, जिसमें हम मत के जरिये अपनी मनचाही सरकार बनाते है। वही सरकार आम नागरिक के कल्याण के लिए
कल्याणकारी योजनाऐं बनाती है, परन्तु जिसे हम मतदान कर सरकार में पहँचाते है वहीं जनता के विश्वास को लूटकर हमारे देश के ध्न को विदेशी बैंको में जमा कर देते है। क्या हमने जिसे अपने मतदान से चुना वो दोषी है, या हम दोषी है? दोषी कोई भी हो, बोझ तो जनता के उपर ही आता है, कभी टैक्स की बढ़ोत्तरी में, तो कभी मंहगाई के रूप में या कभी बेरोजगारी के रूप में देश की कमर टूटती है। आखिरकार हम ऐसे लोगो को चुनते ही क्यो है जो धर्म  के नाम पर, जाति के नाम पर जनता को गुमराह करके शासन में अपनी पैठ बना लेते है और पिफर अपनी शपथ को भूलकर सरकारी खजाने पर डाका डालते रहते है। क्या वास्तव में ऐसे लोग देश प्रेमी है या जनता ही दोषी है?
आज हम खुद को जागरूक नागरिक की संज्ञा देकर अपने ऊपर गर्व महसूस करते है लेकिन आजतक हम ऐसे ही नेताओ को चुनते आ रहे है, जो हमे दोनो हाथो से लूटते चले आ रहे है। कितने दुर्भाग्य की बात है कि भारत की आबादी का 40 प्रतिशत भाग आज भी एक वक्त की रोटी खाकर भुखे पेट सो जाता है। इन सवालों का जवाब भारतवर्ष के आम नागरिक और पढ़े-लिखे समाज को ही देना होगा। सर्वप्रथम हमे धर्म भूलकर केवल भारतीय बनना होगा, यदि भारत ही सुरक्षित नही रहेगा तो ध्र्म कहां से सुरक्षित रह जायेगा। हमें जागरूक नागरिक बनना होगा। हमें यह भी पता होना चाहिए कि यदि सरकार हमसे टैक्स ले रही है तो उसका उपयोग कहां हो रहा है, जिसे जानने का हमें पूरा अधिकार  है। यह सब करने से नही बल्कि अपने दिलो दिमाग पर भारतीय सोच का पर्दा डालना होगा। तभी हम अपने देश की बुराईयों को खत्म कर सकते है और देश को उन्नति की ओर ले जा सकते है, वरना हम यूं ही नेताओ को कोसते रहेगें और वे धर्म और जाति के नाम पर भारतीय समाज को लड़ाकर अपनी स्वार्थ को पूरा करते रहेंगे।


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Akshaya Gaurav

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