न टूटे जो कभी प्यारा वही विश्वास है अम्मा।
सुखद मोहक मनोहर सा मधुर मधुमास है अम्मा।
कड़ी गर धूप है जग तो बड़ी है एक सच्चाई,
जलद ममता जहाँ छाए वही आकाश है अम्मा॥




मेरी आँखों में अश्क आने देती कभी नहीं।
देती है मुझको सिर्फ कुछ भी लेती कभी नहीं।
बच्चों में उसकी जान बसती है देखिए सदा,
अम्मा हमको बददुआएँ देती कभी नही॥

उसके आगे क्या है केक।
ब्रेड बटर हम देंगे फेंक।
सोते खाकर हम भरपेट,
माँ देती जब रोटी सेक॥

अगर वो सामने आए मुझे इक बात कहना है।
बता आखिर मुझे कब तक थपेड़े-वक्त सहना।
सजा किस बात की मिलती बताता वो नहीं 'पूतू',
नहीं उत्तर मिला अब तक जटिल यह प्रश्न कितना है॥

हृदय के खेत में हरदम नए से दर्द बोता है।
बहाकर अश्क तो अपना सदा दामन भिगोता है।
कदम तो डगमगाते हैं उठाए भार साँसोँ का,
सहारे याद के जीना कठिन तो काम होता है॥

पीयूष कुमार द्विवेदी 'पूतू'
स्नातकोत्तर (हिंदी साहित्य,स्वर्ण पदक), नेट (तीन बार)
संपर्क- ग्राम-टीसी,पोस्ट-हसवा,जिला-फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)-212645
मो.-08604112963
ई.मेल-putupiyush@gmail.com


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Akshaya Gaurav

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