महाराष्ट्र में भाजपा के अन्य पिछड़ी जाति का चेहरा एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री गोपीनाथ मुंडे एक सप्ताह पहले ही पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए थे और वह राज्य में कांग्रेस-राकांपा गठबंधन से सत्ता छीनने के लिए आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के अभियान का नेतृत्व करने की तैयारी कर रहे थे।
64 वर्षीय ग्रामीण विकास मंत्री का आज यहां एक सड़क दुर्घटना में निधन हो गया, वह पांच बार विधायक रह चुके थे और उनके मन में हमेशा ही महाराष्ट्र में भाजपा का पहला मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा रही। राकांपा प्रमुख शरद पवार के ज्ञात आलोचक मंडे को इस बात का श्रेय दिया जाता है कि उन्होंने इस मराठा राजनीतिज्ञ के प्रभाव को इस सीमा तक बेअसर कर दिया कि शिवसेना-भाजपा गठबंधन 1995 में सत्ता में आ सका और वह उप मुख्यमंत्री बने।

दिवंगत भाजपा नेता प्रमोद महाजन के बहनोई मुंडे पिछड़े मराठवाड़ा क्षेत्र के एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे। उन्हें राजनीति में भाजपा के दिवंगत नेता वसंतराव भागवत लेकर आए थे जिन्होंने प्रमोद महाजन सहित कई अन्य नेताओं को राजनीति में पारंगत बनाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा नेतृत्व के साथ मिलकर मुंडे को महाराष्ट्र में पार्टी के प्रचार अभियान का नेतृत्व करने के लिए चुना था जहां पर चार महीने बाद विधानसभा चुनाव होना है। मुंडे 15वीं लोकसभा में भाजपा के उप नेता थे। पवार द्वारा इस बार बीड़ सीट को प्रतीष्ठा का मुद्दा बनाये जाने के बावजूद मुंडे वहां से लोकसभा चुनाव जीते थे।
मुंडे राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के महासचिव भी रहे। इसके साथ ही वह 15वीं लोकसभा में रसायन एवं उर्वरक संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष थे। 12 दिसम्बर 1949 को जन्मे और बीड जिले के नाथरा गांव के रहने वाले मुंडे 1980-1985, 1990-2009 के बीच पांच बार महाराष्ट्र विधानसभा के विधायक रहे। उनका जन्म वंजारी (जाति) के मध्यम वर्गीय किसान परिवार में हुआ था तथा उनके पिता पांडुरंग मुंडे और मां लिम्बाबाई मुंडे थीं।
मुंडे के परिवार में पत्नी और तीन पुत्रियां पंकजा, प्रीतम और यशश्री हैं। पंकजा पलावे बीड जिले में परली विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करती हैं। महाराष्ट्र में अपने दिवंगत साले प्रमोद महाजन के साथ लगभग दो दशकों तक पार्टी के प्रमुख नेता रहे मुंडे राज्य में सामाजिक इंजीनियरिंग फार्मूले के सूत्रधार थे जिसके तहत विपक्षी ‘महायुती’ गठबंधन हुआ जिसे हाल में सम्पन्न लोकसभा चुनाव में राज्य में 48 में से 42 सीटें मिली।
मुंडे 1992-1995 के बीच महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता थे। उन्होंने 1995-1999 के बीच महाराष्ट्र में उप मुख्यमंत्री के साथ ही विभिन्न भूमिकाएं निभायीं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साथ की। वह तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाये गए आपातकाल के दौरान सरकार के खिलाफ हुए आंदोलन का हिस्सा थे।
मुंडे का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल होना उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ था। उन्हें बाद में भाजपा की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा की महाराष्ट्र इकाई का अध्यक्ष बनाया गया।

साभार: प्रभासाक्षी



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Akshaya Gaurav

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