चले थे बड़े गुमां के साथ
दिल में हसरत-ए-अरमां लिए
तलाश-ए-मजिल की 
निकल पड़े अन्जां राह पर....
निकल आये बहुत दूर कि
दिखाई दी वीराने में 
धुंध रोशनी सी
और धुधंली सी राह.... 
लेकिन जमाने की बेरूखी
और गन्दी सोच तो देखिये
बिछा दिये काटें राह में
जमाने का दस्तूर है ये तो
कसर ना छोड़ी राह ने भी 
ठोकरे देने में हमें....
लेकिन चलते रहे फिर भी
हसरत-ए-अरमां लिए
कि जमाने को दिखा देंगे
कम नही तुझसे हम भी....
खुश हुए पलभर के लिए
कि हरा दिया जमाने को हमने
मंजिल-ए-करीब थे जब....
लेकिन देखिये तो सही 
जिगर-ए-राजन
छोड़ आये मंजिल को 
खुशी के लिए जमाने की
और हार गये जीत कर भी 
हम जमाने से!!!

राजेन्द्र सिंह
मेरठ (उत्तर प्रदेश)


Axact

Akshaya Gaurav

hindi sahitya, hindi literature, hindi stories, hindi poems, hindi poetry, motivational stories, inspirational stories, हिन्दी साहित्य, कहानियाँ, हिन्दी कविताएँ, काव्य, प्रेरक कहानियाँ, प्रेरक कहानियाँ, व्यंग्य.

loading...

POST A COMMENT :