जिन लोगों को धूम्रपान की गलत आदत पड़ी हुई है वे प्रायः चाहकर भी इससे बाहर नहीं आ पाते। अधिकांश लोग इसकी कोशिश करते हैं और कुछ दिन के लिए सिगरेट छोड़ देते हैं। लेकिन कुछ दिन बीतते-बीतते उन्हें फिर तलब सताने लगती है और फिर शुरूआत हो जाती है धूम्रपान की। यही वजह है कि जहाँ सिगरेटों का धंधा खूब चमक रहा है, वहीं सिगरेट छुड़वाने वाली दवाओं, गोलियों आदि की भी बाढ़ आई हुई है। इनमें से कुछ काम करती हैं कुछ नहीं।
बहरहाल, तकनीक ने ऐसे लोगों को धूम्रपान की आदत से छुटकारा दिलाने की उम्मीद जगाई है। ऐसा संभव हुआ है- इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के जरिए, जो एकदम सिगरेट जैसी ही दिखने वाली चीज है। वह एकदम सिगरेट जैसा ही धुआँ भी निकालती है, लेकिन फर्क यह है कि इस धुएँ में हानिकारक तत्व निकोटीन बिल्कुल नहीं है।
इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट को पर्सनल वेपराइजर भी कहते हैं, जो वास्तव में बैटरी से संचालित गैजेट है। इसके जरिए 'धूम्रपान' करने का अनुभव एकदम वैसा ही होता है, जैसा कि सिगरेट या बीड़ी पीने पर होता है। फर्क यह है कि इसके भीतर 'एटमाइज़र' नामक हीटिंग एलीमेंट लगा होता है। ई-सिगरेट के भीतर ही मौजूद एक
तरल पदार्थ हीटिंग एलीमेंट के माध्यम से गर्म होता रहता है और उससे भाप निकलती है, जिसका रंग सिगरेट के धुएं की ही तरह सफेद होता है। ई-सिगरेट में प्रयुक्त तरल पदार्थ ग्लिसरीन, ग्लाइकोल, प्रोपिलीन आदि का मिश्रण हो सकता है। कुछ अन्य सिगरेटों में निकोटीन जैसी ही गंध वाला द्रव मौजूद होता है। पश्चिमी देशों में ई-सिगरेट काफी लोकप्रिय हो रही है। बड़ी संख्या में लोगों ने इसका प्रयोग कर धूम्रपान से छुटकारा पाने में सफलता भी हासिल की है। लेकिन कहते हैं कि अच्छाई और बुराई के बीच चोली-दामन का साथ होता है। ई-सिगरेट, जो कि एक सुरक्षित उत्पाद था, के साथ भी ऐसे प्रयोग किए जाने लगे हैं जो उसे असुरक्षित बनाने लगे हैं। कुछ कंपनियों ने ऐसी ई-सिगरेट बनानी शुरू कर दी है, जिसमें बाकायदा निकोटीन मौजूद है। धूम्रपान के लती लोगों के बीच यह स्वाभाविक रूप से अपनी जगह बना रही है। पश्चिमी देशों में किए गए अध्ययनों से पता चला है कि जहाँ इनके अधिकांश प्रयोक्ता पहले से सिगरेट पीने वाले लोग हैं, वहीं हर दस में से एक प्रयोक्ता ऐसा है, जिसने कभी सिगरेट नहीं पी। अमेरिकी हाईस्कूलों के दस प्रतिशत छात्रों ने कभी न कभी ई-सिगरेट का सेवन किया है। सन् 2011 के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका के 3.4 प्रतिशत नागरिक भी ई-सिगरेट का सेवन कर चुके हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि ई-सिगरेट नए लोगों को भी धूम्रपान की ओर मोड़ रही है, भले ही वह वास्तविक धूम्रपान न हो।

बालेन्दु शर्मा दाधीच 
नई दिल्ली 


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Akshaya Gaurav

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