तेरे दिल को हम अपनी जागीर समझ बैठे।
अपने आंसुओं को हम तकदीर समझ बैठे।

हर मोंड पे मिल जाना, बाते हंस के करना
संग संग चलता तेरा, इजहार समझ बैठे।

वफा देखी नही तेरी, बेवफा कह नही सकता-
जिससे दर्द मिला मुझको, उसे प्यार समझ बैठे।

हर कदम रूलायेगी ये जिन्दगी मालूम नही था-
हर दर पर मिलती ठोकरं, इसे संसार समझ बैठे।

जला ली शमां अपनी, कोई तूफानो से कह दे
आंधियों को अब यहां, दिल धडकने समझ बैठे।

तकदीर बदल लेगें, तदबीर से हम अपनी-
अंगारों को राज अब चिंगारी समझ बैठे।


राजकुमार तिवारी 
"राज बाराबंकवी"



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Akshaya Gaurav

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