सुख-सम्पदा, वैभव-ऐश्वर्य, उत्तराधिकार तथा चहुमुखी उन्नति के लिए ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य तथा शनि ग्रहों का स्थान महत्वपूर्ण है। शनि-कुबेर सम धन देता है तो दूसरी ओर कंगाल भी बना देता है। सूर्य वैभव, ऐश्वर्य तथा समाजिक प्रतिष्ठा और उन्नति देता है। वहीं किसी भी रुप से कुण्डली में यह पीड़ित हो तो जीवन भर निर्वाह के लिए ऐढ़ियां रगड़वाता रहता है। दोनों ग्रहों का कुण्डली में शुभ स्थान, बलादि होना आवश्य है। धन तथा समाज से पीड़ित व्यक्ति तुरंत समझ लें कि कहीं न कहीं इन दो ग्रहों को दुष्प्रभाव जन्म पत्री में अवश्य है। सूर्य भारतीय ज्योतिष में शनि का पिता माना गया है। अनोखी बात यह है कि पिता पुत्र होते हुए भी देानों परस्पर परमशत्रु हैं। वर्ष में एक बार मकर संक्राति को सूर्य शनि के घर में प्रवेश करता है। इस दिन का धार्मिक, पौराणिक, सामाजिक तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोंण से तो महत्व है ही, तंत्र क्षेत्र में भी इस दिन का विशेष प्रभाव रहता है। यदि कहीं भी आपको लगता है कि इन दो ग्रहों का दुष्प्रभाव आपको घेरे हुए है तो निम्न उपाय एक बार अवश्य करें। सामान्य रुप से भी यह उपाय किया जा सकता है। मैं पुनः पुनः लिख देता हॅू कि मेरे पदार्थ तंत्र से अनहित की तो लेशमात्र भी संभावना नहीं है।
     हिन्दु संस्कृति में वैसे तो इस दिन खिचड़ी आदि दान देने का प्रचलन है। वह अपने-अपने मत अथवा परम्परानुसार जो भी है, वह तो करते ही रहें। इस दिन कहीं पीपल के सघन वृक्ष के नीचे सूर्य की होरा में एक तांबे के पात्र में गेंहू तथा गुड़ भरकर ऐसे दबा दें कि पात्र का मुह थोड़ा सा खुला रहे। उसके पास ही तांबे की बनी हुयी एक अंगूठी दबा दें। अंगूठी बीच से कटी हुई होनी चाहिए। संक्रान्ति में ही शनि की होरा में किसी बेल के वृक्ष के नीचे लोहे के किसी पात्र में काले तिल तथा बाजरा भर कर दबा दें। पहले की भांति पात्र का मुंह थोड़ा सा खुला रहे। उददेश्य यह है कि भरी हुई सामग्री में चींटी लग जाएं। इस पात्र के पास एक लोहे की अंगूठी शनि होरा काल में दबा दें। यह अंगूठी भी बीच से कटी हुई होना चाहिए।
     कम से कम एक मास तक यह सब ऐसे ही रहने दें। इनका करना कुछ नहीं है। एक माह बाद किसी शनि के नक्षत्र में तथा शनि की होरा में तांबे वाली अंगूठी निकालकर तथा साफ करके अपने दांये हाथ की अनामिका उंगली में धारण कर लें। इससे अगले पड़ने वाले किसी सूर्य के नक्षत्र तथा सूर्य की होरा में लोहे वाली अंगूठी निकालकर साफ कर लें और शनि की होरा काल में दांए हाथ की मध्यमा उंगली में धारण कर लें। यह दो अंगूठियां धन, ख्याति तथा जीवन में उन्नति के मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं। यदि संभव हो तो अंगूठी पूरे वर्ष अर्थात् अगली मकर संक्रान्ति तक धरती में ही दबी रहने दें और उस दिन क्रमशः सूर्य और शनि के होरा काल में निकाल कर धारण कर लें।
     एक वर्ष बाद निकाली गयी ऊर्जाओं का मापन हमनें लेंचर एण्टीना और पी.आई.पी. फोटोग्राफी में तुलनात्मक रुप से बढ़ा हुआ पाया है।

मानसश्री गोपाल राजू (वैज्ञानिक)
30, सिविल लाईन्स, रूड़की 247667 (उ.ख.)
फोन : (01332) 274370 मोः 09760111555
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Akshaya Gaurav

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