उदघाटन सत्र में मुख्य अतिथि।
राष्ट्रभाषा हिन्दी को वैश्विक भाषा बनाया जाना चाहिए। इसकी लिपि बहुत सरल, सुगम और वैज्ञानिक हैं। इसकी सरलता के कारण हिन्दी आज विश्व भाषा के रूप में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है।यह संस्थान विकास करें। उक्त उदगार 12वें साहित्य मेला में मुख्य अतिथि के रुप में पधारे न्यायमूर्ति पं. गिरिधर मालवीय ने कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए।
   विशिष्ट अतिथि के रुप में डाॅ. सुचेत गोइन्दी ने कहा ‘हिन्दी भाषा पर विवाद की स्थिति राजनीतिक कारणों से हो रही है। हिन्दी का प्रसार निरंतर हो रहा है। हिन्दीत्तर प्रान्तों में बहुत सम्मान मिल रहा है। राष्ट्रभाषा, राजभाषा का मूल देशभाषा है। यह गौरव की बात है। अंग्रेजों के चले जाने के बाद वैश्विक स्तर पर विकास हो रहा है। हिन्दी भाषा सुनने में भी कर्णप्रिय है। यह देश, भाषा, देश प्रेम के रुप में हैं। यदि आगे बढ़ना है तो अंग्रेजी जरुरी है लेकिन जर्मनी, चीन, जापान ने बिना अंग्रेजी के उन्नति किया। हमारा जनमानस बदल रहा है। देश की प्रगति बिना अपनी भाषा के नहीं हो सकती। भाषा जीवन मूल्य की भाषा है और श्रद्धा से जुड़ी है।
        कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डाॅ. शिवगोपाल मिश्र जी ने कहा-‘राष्ट्रभाषा के माध्यम से विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान परिषद की स्थापना हुई। हिन्दुस्तानी शब्द पर विवाह हो रहा है। हिन्दी को अनुवाद की भाषा मानते हैं। अंग्रेजी से मदद लेते हैं लेकिन हिन्दी को महत्व देते हैं। घर परिवार के लोग जब हिन्दी का प्रयोग करेंगे तभी हिन्दी का विकास होगा। पहले अंग्रेजी को दोष देते थे अब सबको दोष दे रहे हैं। हिन्दी से स्वाभिमान बढ़ता है। अतिथियों का स्वागत निशा ज्योति संस्कार भारती विद्यालय, नैनी की छात्राओं कोमल कुमारी, खुशी पाण्डेय, आंचल दुबे व श्रेया सिंह के द्वारा स्वागत गीत गाकर किया गया तथा मुख्य अतिथि को न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय को वृहद माल्यार्पण संस्थान के संरक्षक श्री राजकिशोर भारती, सचिव डाॅ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी, विदेश सचिव डाॅ. रेवा नन्दन, संयुक्त सचिव ईश्वर शरण शुक्ला द्वारा किया गया। डाॅ. शिवगोपाल मिश्र को माल्यार्पण संस्थान की अध्यक्षा श्रीमती विजय लक्ष्मी विभा ने तथा विशिष्ट अतिथि डाॅ. सुचेत गोइन्दी को हिन्दी सांसद ओम प्रकाश त्रिपाठी, डाॅ. शहाबुद्दीन नियाज़ मुहम्मद शेख को व्यवस्था सचिव श्री महेन्द्र कुमार अग्रवाल ने किया। संस्थान की प्रगति आख्या संस्था की प्रबंध सचिव श्रीमती जया शुक्ला ने पढ़ी. कार्यक्रम के अंत में मंचासिन अतिथियों को स्मृति चिन्ह, लेखनी व अंगवस्त्रम  श्रीमती विजय लक्ष्मी विभा व महेन्द्र कुमार अग्रवाल ने भेंट की। आभार श्रीमती विजय लक्ष्मी ने प्रकट किया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक राष्ट्रगान से किया गया. कार्यक्रम में राजेस सिंह, सदाशिव विश्वकर्मा, मनमोहन सिंह कुशवाहा, निगम प्रकाश कश्यप, चन्द्रेश प्रकाश कश्यप  ने सक्रिय सहभागिता निभाई. इस अवसर पर मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी-सोनभद्र, एम.कलाम राईन, सत्य प्रकाश, अजामिल व्यास, नंदल हितैषी, बाल कृष्ण पाण्डेय, अनिल गर्ग, मनीषा गर्ग, श्याम किशोर सिंह, बलवीर सिंह, आलोक चतुर्वेदी, राम प्रकाश वरमा, राजेस दुबे, राजेस गोस्वामी, उमाशंकर गुप्त, डाॅ.प्रताप बहादुर खरे, कुलदीप धर सहित लगभग 15 राज्यों के साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी।
विशिष्ट अतिथि डाॅ. शहाबुद्दीन नियाज मुहम्मद शेख ने कहा हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है। हिन्दी की विशिष्ट लिपि है। आजादी से पूर्व हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता मिली। अंग्रेजों की गुलामी लिए हम जिए लेकिन भाषा को मानसिक रुप से ढो रहे हैं. अंग्रेजी में देश के लोग भाषण देते हैं। यहां तक की देश के राष्ट्रपति भी अंग्रेजी में बोलते हैं। किसी तरह का अनुराग नहीं है मातृभाषा के प्रति। भाषा को बचाने से ही संस्कृति बच सकती है। हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है और रहेगी। हमें अपनी संस्कृति को बचाना होगा।
   प्रथम सत्र में विभिन्न विद्यालयों के 15 वर्ष तक के बच्चों की काव्य प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इस प्रतियोगिता में कात्यानी पाठक प्रथम, आर्या त्रिपाठी द्वितीय व सुधाशु सिंह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। तदोपरान्त श्री सूर्य नारायण गुप्त ‘सूर्य’, देवरिया, उ.प्र., डाॅ. दुर्गा शरण मिश्र, वाराणसी, उ.प्र., विजय कुमार सप्पति सिकंदराबाद, आन्ध्र प्रदेश का प्रतियोगात्मक काव्य पाठ हुआ। जिसमें विजय कुमार सप्पति विजयी प्रतिभागी रहे। इस प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल श्रीमती विजय लक्ष्मी विभा, श्री ओम प्रकाश त्रिपाठी, मो. अन्सार शिल्पी रहे। मंचासिन अतिथियों द्वारा श्रीमती उषा सक्सेना, भोपाल, म.प्र. के खण्ड काव्य ‘श्रीकृष्ण लीला’, श्री हरिहर चैधरी गंजाम उड़ीसा के लघु उपन्यास ‘अकेला पंछी’ व डाॅ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी द्वारा संपादित सहयोगी संकलन ‘ये आग कब बुझेगी भाग-5’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर डाॅ0सुचेत गोइन्दी, इलाहाबाद, उ.प्र. को साहित्य गौरव, सुश्री शशि मलहोत्रा, इलाहाबाद को साहित्य श्री, डाॅ0 शहाबुद्दीन नियाज मुहम्मद शेख,अहमदनगर, महाराष्ट्र कोे राष्ट्रभाषा सम्मान, डाॅ. संध्या शुक्ल ‘मृदुल’, जबलपुर, म.प्र. राष्ट्रीय महिला प्रतिभा सम्मान, सूर्य नारायण गुप्त ‘सूर्य’, गौरीबाजार, देवरिया, उ.प्र. कैलाश गौतम सम्मान, डाॅ0अलका गडकरीे, औरंगाबाद, महाराष्ट्र को शिक्षकश्री, विजय कुमार सप्पति, सिकंदराबाद, आन्ध्र प्रदेश को हिन्दी सेवी सम्मान, श्री राज कुमार जैन ‘राजन’, चित्तौड़गढ़, राजस्थान को राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान, आशीष आनन्द आर्य ‘इच्छित’-गोवा-युवा प्रतिभा सम्मान, निगम प्रकाश कश्यप, मिर्जापुर, उ.प्र. को प्रशस्ति पत्र, अंकिता साहू, इलाहाबाद, उ.प्र.निर्भया सम्मान, सुश्री प्रतिमा मिश्रा, इलाहाबाद-युवा कवयित्री सम्मान को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। विशिष्ट अतिथि के रुप में डाॅ. सुचेत गोइन्दी ने कहा ‘हिन्दी भाषा पर विवाद की स्थिति राजनीतिक कारणों से हो रही है। हिन्दी का प्रसार निरंतर हो रहा है। हिन्दीत्तर प्रान्तों में बहुत सम्मान मिल रहा है। राष्ट्रभाषा, राजभाषा का मूल देशभाषा है। यह गौरव की बात है। अंग्रेजों के चले जाने के बाद वैश्विक स्तर पर विकास हो रहा है। हिन्दी भाषा सुनने में भी कर्णप्रिय है। यह देश, भाषा, देश प्रेम के रुप में हैं। यदि आगे बढ़ना है तो अंग्रेजी जरुरी है लेकिन जर्मनी, चीन, जापान ने बिना अंग्रेजी के उन्नति किया। हमारा जनमानस बदल रहा है। देश की प्रगति बिना अपनी भाषा के नहीं हो सकती। भाषा जीवन मूल्य की भाषा है और श्रद्धा से जुड़ी है।
    विशिष्ट अतिथि डाॅ. शहाबुद्दीन नियाज मुहम्मद शेख ने कहा हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है। हिन्दी की विशिष्ट लिपि है। आजादी से पूर्व हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता मिली। अंग्रेजों की गुलामी लिए हम जिए लेकिन भाषा को मानसिक रुप से ढो रहे हैं। अंग्रेजी में देश के लोग भाषण देते हैं। यहां तक की देश के राष्ट्रपति भी अंग्रेजी में बोलते हैं। किसी तरह का अनुराग नहीं है मातृभाषा के प्रति। भाषा को बचाने से ही संस्कृति बच सकती है। हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है और रहेगी। हमें अपनी संस्कृति को बचाना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डाॅ. शिवगोपाल मिश्र जी ने कहा-‘राष्ट्रभाषा के माध्यम से विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान परिषद की स्थापना हुई। हिन्दुस्तानी शब्द पर विवाह हो रहा है। हिन्दी को अनुवाद की भाषा मानते हैं। अंग्रेजी से मदद लेते हैं लेकिन हिन्दी को महत्व देते हैं। घर परिवार के लोग जब हिन्दी का प्रयोग करेंगे तभी हिन्दी का विकास होगा। पहले अंग्रेजी को दोष देते थे अब सबको दोष दे रहे हैं। हिन्दी से स्वाभिमान बढ़ता है।
    अतिथियों का स्वागत निशा ज्योति संस्कार भारती विद्यालय, नैनी की छात्राओं कोमल कुमारी, खुशी पाण्डेय, आंचल दुबे व श्रेया सिंह के द्वारा स्वागत गीत गाकर किया गया तथा मुख्य अतिथि को न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय को वृहद माल्यार्पण संस्थान के संरक्षक श्री राजकिशोर भारती, सचिव डाॅ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी, विदेश सचिव डाॅ. रेवा नन्दन, संयुक्त सचिव ईश्वर शरण शुक्ला द्वारा किया गया। डाॅ. शिवगोपाल मिश्र को माल्यार्पण संस्थान की अध्यक्षा श्रीमती विजय लक्ष्मी विभा ने तथा विशिष्ट अतिथि डाॅ. सुचेत गोइन्दी को हिन्दी सांसद ओम प्रकाश त्रिपाठी, डाॅ. शहाबुद्दीन नियाज़ मुहम्मद शेख को व्यवस्था सचिव श्री महेन्द्र कुमार अग्रवाल ने किया। संस्थान की प्रगति आख्या संस्था की प्रबंध सचिव श्रीमती जया शुक्ला ने पढ़ी कार्यक्रम के अंत में मंचासिन अतिथियों को स्मृति चिन्ह, लेखनी व अंगवस्त्रम  श्रीमती विजय लक्ष्मी विभा व महेन्द्र कुमार अग्रवाल ने भेंट की। आभार श्रीमती विजय लक्ष्मी ने प्रकट किया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक राष्ट्रगान से किया गया. कार्यक्रम में राजेस सिंह, सदाशिव विश्वकर्मा, मनमोहन सिंह कुशवाहा, निगम प्रकाश कश्यप, चन्द्रेश प्रकाश कश्यप  ने सक्रिय सहभागिता निभाई। इस अवसर पर मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी-सोनभद्र, एम.कलाम राईन, सत्य प्रकाश, अजामिल व्यास, नंदल हितैषी, बाल कृष्ण पाण्डेय, अनिल गर्ग, मनीषा गर्ग, श्याम किशोर सिंह, बलवीर सिंह, आलोक चतुर्वेदी, राम प्रकाश वरमा, राजेस दुबे, राजेस गोस्वामी, उमाशंकर गुप्त, डाॅ.प्रताप बहादुर खरे, कुलदीप धर सहित लगभग 15 राज्यों के साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी।


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Akshaya Gaurav

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