सरदार, एक अच्छी खबर लाया हूँ।
क्या खबर हैं ?
पडोस के गांव से लगे गांव में एक घर में जाना हुआ देखा बहुत माल है। घर में सिर्फ पति पत्नि है और कोई नही, चाहो तो आज रात डकैती डाल दो।
तू तो नाई है, तेरी खबर कभी झूंठी नही हो सकती, तेरा वास्ता तो घर के अन्दर ही पडता है।
सही कह रहे हो सरदार, अब की खबर बहुत अच्छी है। काफी दिनों तक डकैती डालने की जरुरत नही पडेगी।
ठीक है, अगर अच्छा माल मिला तो तेरी भी चांदी हांगी।
हां सरदार, इसी लिए पक्की खबर लाया हूं।
ठीक है, सब लोगों को खबर कर दो कि सरदार ने बुलाया है, एक  काम पर जाना है।
सरदार अभी जाता हूं। कहकर खबरची सरदार के अन्य साथियो को सरदार की खबर देनें निकल पडता है। सरदार भी रात की तैयारी के लिए अपने हथियारो को ठीक करके रखने के लिए उठकर अपने अडडे पर पहुंच जाता है।
शाम को सरदार के गिरोह के लोग एक साथ इक्टठा होतें है। खबरची भी अडडे पर पहुच जाता है।
सब तैयार है। सरदार ने कहा।
हां सरदार हम सब तैयार है।
खबरची को आगे रखो ताकि वह हमे मकान की शिनाख्त करा सके।
हां सरदार मैं आगे हूं। बस आप लोग मेरे पीछे-पीछे आते रहो, कहकर खबरची आगे-आगे चलता है, पीछे सरदार तथा उसके साथी चल देते है। रात का एक बजा है, गांव में सन्नाटा है। खबरची अपनी शिनाख्त मकान की करता है। सरदार ने मकान को चारो ओर देखा, कहां से घर में आसानी से जाया जा सकता है।सरदार को घर में जाने का रास्ता मिल जाता है। सरदार दीवार के सहारे पेड पर पहुंचकर छत पर पहुचता है, बाकी लोग भी छत पर पहुंचकर घर में दाखिल हो जाते है। दोनों अपने कमरे में सो रहे है। सरदार पति को जगाता है, उसकी आंख खुल जाती है, डकैतो को देखकर वह घबरा जाता है। डाकू पति को रस्सी से बांध देते है, तभी पत्नि की आंख खुल जाती है, वह डकैतो को चिल्लाते हुए कहती है- तुमने मेरे घर में गलत हाथ डाल दिया, इसका खामियाजा तुम्हें भुगतना पडेंगा। तुम्हें माल चाहिए अभी लाती हूं। कहकर पत्नि घर में गई जितना सोना पैसा था सब सरदार के आगे लाकर डाल दिया। बाकी लोग घर का कीमती सामान ढूंड-ढूंड कर इक्टठा करने लगे।
पत्नि चिल्लाती रही तुम मुझे नही जानते मेरा भाई भी डकैत है अगर उसे पता चला कि उसकी बहन के यहां डकैती पडी है, वह तुम्हें जिन्दा नही छोडेगा, और तुम सारा सामान जैसे ले जा रहे हो वैसे ही वापस लौटाने आओगे। तुम्हारी खैरियत इसी में है कि तुम चले जाओ।
सरदार व उसके साथियों ने एक न सुनी वह घर का सारा सामान इक्टठा करते रहे। कुछ देर बाद घर का सारा सामान इक्टठा करने के बाद सरदार ने पत्नि से कहा- ऐ औरत अभी दुनिया में ऐसा कोई माई का लाल पैदा नही हुआ जो मुझसे लूटा हुआ सामान ले सके। मुझे भी तेरे उस भाई का इन्तजार रहेगा। मुझे खुशी है कि इस डरपोक दुनिया में कोई तो मर्द है, जो मुझसे टकरायेगा, पर एक बात बता तू किसकी बेटी है, जो हमें देखकर इतनी निडर होकर बोल रही है, और तेरा वह कौन सा भाई है, और उसका क्या नाम है। हम भी तो सुने उस सूरमा का नाम जिस पर तू इतना इतरा रही है।
तो सुन मेरे पिता का नाम मान सिंह है जो अपने जमाने का मशहूर डाकू है, उसका एक शार्गिद है जिसका नाम मुमताज है।
इतना सुनते ही सरदार हक्का-बक्का रह गया और बोला- जिसको तू अपना भाई बता रही है, कभी उसे देखा है।
नही पर मुझे अपने भाई पर पूरा भरोसा है, अगर उसे पता चला तो वह जरुर आयेगा।
सरदार कुछ देर चुप बैठा उस  औरत की तरफ देखता रहा फिर बोला-
बहन, मैं ही मुमताज हूं। जिस भाई की तू दुहाई दे रही है वह तेरे सामने खडा है। तुझे अपने भाई जिसे तूने देखा तक नही था, तूने उस पर भरोसा किया तो मेरा भी फर्ज बनता है कि मै अपनी बहन के रिश्ते पर खरा उतरा हूं। बहन मुझसे बहुत बडी भूल हो गई मैंनें खबरची बातों में आकर अपनी बहन के घर डकैती डाल दी।
बहन मैं तेरे घर पहली बार आया, वह भी डकैत के रुप में मुझे माफ कर दे।
सरदार ने जेब से सौ रुपये निकाल कर बहन को देते हुए सारा सामान छोडकर वापस लौट गया, और डाकू ने रिश्ते का मान रखा। कुछ रिश्ते ऐसे होते है जो पैतृक रिश्तो से मजबूत बन जाते है, जैसा मुमताज के साथ हुआ।

 

डा0 फखरे आलम खान

(लेखक अक्षय गौरव पत्रिका में प्रधान संपादक है।)



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Akshaya Gaurav

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