खुली उदास आँखें और उनकी चुप्पी 
किसी तूफ़ान के आने का संकेत नहीं है
तुम्हारा यह भ्रम कि
यह तूफ़ान के आने से पहले की शांति है
उदास आँखों से बना कि चुप्पी से
तूफान को नहीं पता
शायद उसे पता हो ... कह नहीं सकते

अनेकानेक तूफानों को उसने
अपने मन के समंदर के
नीचे की तलहटी में बनी
कोठरी के अंदर
एक गठरी के मुख पर
मजबूत गाँठ बाँध छुपा दिया कि
कभी समंदर में आए तूफानों के टकराने से 
यदि कोठरी का दरवाजा खुले भी तो
गठरी  खुल पाए ...

गठरी के खुलने पर
कभी कोई जादू नहीं हुआ
और इसीलिए
नहीं बदले कभी उसके लिए
ये मौसम, आसमान, धरती या सितारे 
यूं तो हर बदलते मौसम के साथ
बदलता है इंसान
और कभी-कभी इन्सानों के लिए
बदलते हैं मौसम
गठरी के मायने उसे पता हैं
दरअसल वह एक औरत है। 





   लेखिका : पूनम मनु
   (लेखिका की रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती है)


Axact

Akshaya Gaurav

hindi sahitya, hindi literature, hindi stories, hindi poems, hindi poetry, motivational stories, inspirational stories, हिन्दी साहित्य, कहानियाँ, हिन्दी कविताएँ, काव्य, प्रेरक कहानियाँ, प्रेरक कहानियाँ, व्यंग्य.

loading...

POST A COMMENT :