और खेल भी वही है राजनीति
बस मदारी बदल गया है
इस बार भी हर बार की तरह कई जमूरे हैं
मुझ जैसे अनाड़ी टकटकी लगाए
देख रहे हैं उसकी ओर
यह जानने को उत्सुक
कि कौन-कौन से खेल में
माहिर है ये मदारी और
पहले दिखाने वाला है कौन सा खेल
जिस भी खेल में जितना मज़ा आएगा
उतनी ही तालियाँ बजाएगी जनता मेरे साथ...
जोकि भोली है
और भर देगी उसका दामन
आशीषों से, उम्मीदों के साथ कि
इस जादू से ही होगा
नया सवेरा अंधेरी गलियों में
और मिलेगी इज्ज़त के साथ दो रोटी
कि ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’
भोली जनता नहीं जानती
मदारी जादू नहीं करता
खेल दिखाकर
बस अपनी झोली भरता है।


पूनम मनु
मेरठ 250001, उत्तर प्रदेश
E-mail : poonam.rana308@gmail.com
(लेखिका की रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती है)


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Akshaya Gaurav

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