हे मानव, तू संसार की सर्वश्रेष्ट योनी में बिराजमान है। मानव होने के नाते तुझ वर समस्त प्राणियों की सुरक्षा का भार है। हम सब प्राणियों की रचना ऊपर वाले ने मानव के कल्याण के लिये की है। तू इतना निर्दयी एवंम कठोर क्यों हो गया है। यह कौन बोला जिसमें मानव के प्रति इतनी घृणा हो गई है। प्राणी हम है,तुम्हारे मौहल्ले की कुतिया एवंम कुत्ते।
बताओ तुम्हें क्या कष्ट हैं।  
हम दो बहने है हमारे चार-चार बच्चे तथा दो भाई थे।
क्या मतलब थे?
हाँ इस मानव ने हमारे दो बच्चों पर मोटर चढ़ाकर मार डाला बाकी कुत्तों पर मौहल्ले के लोग रोज सितम करते है। हमें डण्डों,ईटटों से मारा जाता है,मेरी टांग तोड दी,अन्य कुत्तों की भी टंाग तोड दी गयी ।हम पर मानव द्वारा इतना जुल्म केवल इसलिए है कि हम कुत्तें है।
मैं तुम्हारा दर्द समझता हूं,पर तुम्हारी भी गलती है कि तुम मौहल्ले के लोगों को भोंकते हो,छोटे बच्चों पर हमला करती हो। तो बताओ तुम्हें क्यों न मारा जाए। हमारे भौंकने के लिए भी यह मानव ही जिम्मंेदार है।
मानव कैसे जिम्मेदार है?जब हम भूखें होते है तो घरो में घुसकर डस्टबीन से कूडा उठाकर गली में लाकर उसमें खाना तलाश करके अपना पेट भरते है। भूखे रहने पर हम लोगो से रो-रो कर फरियाद करते है। हमें खाने को दो, जब नही सुनते तो उन्हें डराने के लिए हमला करते है,परन्तु वह हमारी आवाज नही सुनते,उन्ही में से एक तुम हो।
मैं कैसे हूं ?
पहले तुम हमें खाने के लिए देते थे,तुमने भी खाना देना बन्द कर दिया है। अब भूखे हैं। आप सही कह रहे हो। मेरी मजबूरी है।
तुम्हारी क्या मजबूरी है ?
मौहल्ले के लोगों का इल्जाम है आपने इन्हे खाना देकर वही रोक लिया है, यह गली  में गन्दगी फैला रहे है। मुझे अपने समूह में रहना है उनकी बात तो माननी ही पडेगी,फिर भी मैं तुम्हें रात के तीसरे पहर खाने को देता हूं। मैं भी अपने मौहल्ले के लोगो से मजबूर हूं।
हमारी कुछ तो मदद करो जिससे मानव हम पर जुल्म करना बन्द कर दें।
यह बात ठीक है। मेरी निगाह में एक महारानी है मै। उसके युवराज को जानता हूं। युवराज से आपकी परेशानी कह सकता हूं। हो सके वही आपकी समस्या कर समाधान  कर दें।
हम आपके सदा आभारी रहेंगें।
अगले दिन लेखक महोदय ने युवराज को फोन लगाया।
हैलो ,युवराज है।
आप कौन हैं?
मैं लेखक बोल रहा हूं।
मैं आपकी आवाज पहचान गया,आप मेरठ से बोल रहे है ना,मैंने आपके लेख पढें है।आप हिन्दी की सेवा भी करते है। मुझे बतायें आपको युवराज से क्या काम पड गया ? आप अपनी परेशानी बताऐं,समाधान किया जायेगा।भाई लोग मेरे मौहल्ले में कुत्तों को मारते है,उनकी टांगें तोड दी,दो बच्चों पर गाडी चढाकर मार डाला। कुत्तो का यह दर्द मुझसे देखा नही जाता अगर उनके समाधान के लिए कुछ कर सकते है तो करें। ताकि उनकी यातनांएं कम हो जाएं।लेखक महोदय आपकी कहानियों में जो करुणा पायी जाती है वह सत्य है जो कुत्तों के दर्द में सामने पृकट हो रही है। इन्सान वही जो पक्षियों,पशुओ आदि जीव जन्तुओं पर दया करें।
मैं युवराज से कह कर कुछ न कुछ समाधान अवश्य करांऊगां।
मैं आपका आभारी रहूंगा।
इसमें आभार कैसा आप किसी व्यक्तिगत या मानव के काम का तो नही कह रहेे जिसमें आपका स्वार्थ हो। यह काम आपका जरुर होगा।
अगले दिन युवराज के सामने की पीडा रखी गयी। युवराज ने कुत्तों की पीडा से सम्बन्धित पत्र जिले के मुखिया को लिखा जिसमें पीडा के निदान की कार्यवाही के लिए कहा गया।
जिले के मुखिया ने समाधान हेतू स्वास्थय अधिकारी महोदय तथा पुलिस मुखिया को लिखा।
स्वास्थय अधिकारी महोदय ने मौहल्ले में जांच किये बगैर कुत्तों को पकडकर शहर बदर कर दिया। कुत्तों को यह कैया इंसाफ मिला। खैर जो कुछ हुआ अच्छा हुआ। कम से कम कुत्तें लोगों के जुल्म सितम से निजात पा गये,रही खाने की बात वह काम भगवान का है,वह सब अच्छे बुरे जीवों को उनकी भूख अनुसार देता है। लेकिन लेखक को सिर्फ अफसोस इस बात का है कि उन लोंगों को कब सजा मिलेंगी जिन्होनें कुत्तों को मारा पीटा था। लेखक को भरोसा है,खुदा की लाठी में आवाज नही होती है जब पडती है आवाज नही करती। बल्कि इंसान को बरबाद करती है। अभी खुदा का इंसाफ बाकी है। वह भी जरुर जल्द ही सबके सामने आयेगा।


 
डा0 फखरे आलम खान
अमता हाउस, जैदी नगर सोसाईटी, मेरठ 
(लेखक अक्षय गौरव पत्रिका में प्रधान संपादक है।)



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Akshaya Gaurav

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