बापू मैं भी नेता बनूंगा।
अरे तू कैसे नेता बनेगा? पढ़ा लिखा तू नहीं।
बापू नेता बनने के लिए पढ़ा लिखा होना जरुरी नही।
मैं हस्ताक्षर तो करना जानता हूं। नेता बनने के लिए इतना जरुरी हैं।
अरें पागल नेता बनने के  लिए और कुछ भी जरुरी है।
वह क्या बापू ?
नेता बनने के लिए पैसे वाला  जरुरी है।
बापे नेता के लिए पैसा इसलिए जरुरी हैं कि नेता के लिए कदम-कदम पर पैसा खर्च करना पडता है। जैसे कोई नेता आपने बुलाया है तो नेता को खुश करने के लिए आदमियों की भीड चाहिए, आज बेरोजगारी है हजारो युवा रोजगार के लिए दिन रात भागते फिरते है, उन्हें इक्टठा करने के लिए पैसा देकर इक्टठा किया जा सकता है।। वरना कोई नही आयेंगा।
बापू तू ठीक कहता है मुझे कोई दूसरी तरकीब बताओ।
नेता बनने के लिए दूसरा तरीका है वह बिल्कुल भूंखा नंगा हो, जिस पर समाज की कोई जिम्मेदारी न हो, तो वह नेता बन सकता है।
नही मेरे पर तो आपकी और खेती की जिम्मेदारी है लेकिन बापू आज से खेती व घर की जिम्मेदारी तू सम्भाल। मैं तो चला नेता बनने।
तू बाज नही आयेगा छोरे सुन अगर तुझे वाकई नेता बनना है तो मेरी एक बात ध्यान सेे सुन, उस पर अमल करेगा तो वाकई अच्छा नेता बन सकता है।
जल्दी बता बापू! मुझे नेता बनने के लिए क्या करना होगा ?
मेरी बात ध्यान से सुन। भारत सरकार अन्य देशो से अलग है। हमारा भारत भावना पर आधारित हैं, यहो सबसे सफल और जल्द ऊंचा बनना है तो किसी धार्मिक नेता वाली पार्टी चुन या किसी ऐसे धार्मिक नेता को पकड जो धार्मिक उन्माद वाला हो। बस उसका अनुसरण करले तू भारत का सफल नेता चन्द दिनों में बन जायेगा।
बापू ऐसा नेता कौन हें ?
समाचार पत्रों को पढाकर। हां तुझे तो पढना आता नही, समचार पत्र कैेसे पढेंगा।
तो फिर क्या करुं ?
अरे रोज चौपाल पर जाकर बैठ लोग समाचार पत्र पढतें हैं उनसे सुनाकर।
हां बापू अगर मुझे राजनीति में जाना है तो यह काम जरुर करना पडेगा।
अगले रोज जुम्मन चौपाल पर पहुंचकर अखबार सुनने लगा, कुछ दिन गुजरने के पश्चात उसे भारत की राजनीति समझ में आ गई। जुम्मन ने सोचा चलो धार्मिक उन्माद अपने गांव से शुरु किया जाए। उसके लिए वह अपने गांव के दूसरे धर्म के लोगों के धार्मिक स्थल पहुंचा। शाम का समय था, शाम होते ही जुम्मन ने धार्मिक स्थल पर लाउडस्पीकर पर होने वाले धार्मिक अनुष्ठान का विरोध करना शुरु कर दिया। गांव में जुम्मन के शोर पर दोनो समुदाय के लोग इक्टठा हो गये। जुम्मन के लोगों ने जुम्मन की हां में हां मिलाई। झगडा बढ़ गया। किसी ने पुलिस को फोन कर दिया, मौके पर पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझान की कौशिश की, परन्तु दोनों समुदाय मुंछ की लडाई मानकर एक दूसरे के सामने आ गये। यह बात अगले दिन समाचार पत्रों में छपी,जिसमें जुम्मन का नाम मौटे अक्षरों में छपा था। धार्मिक उन्माद वाली पार्टीयों ने उसे हाथों-हाथ अपने संगठन में लेकर पार्टी में गांव का मुखिया बना दिया। जुम्मन अब खददर पहनकर शहर की बडी पार्टियों में जाने जगा। जुम्मन भाषण देने मे माहिर हो गया। कुछ दिन बाद चुनाव आया वह धार्मिक उन्माद वाली पार्टी से चुनाव मैदान में उतरा। समुदाय ने कडी मेहनत करके उसे चुनाव में जीताकर बडी सभा में भेज दिया।
आज जुम्मन देश की राजनीति में एक जाना पहचाना चेहरा बनकर उभरा है। जुम्मन लोगों से कहता है अगर सफल नेता बनना है तो धार्मिक उन्माद को मजबूती पकड लो। राजनीति में धार्मिक उन्माद ही अच्छा नेता बना सकता है। क्योंकि भारत की जनता भावना में बहकर अपना नेता चुनती है,उसे विकास नही चाहिए वह तो इन नेताओं के माध्यम से अपना धर्म सुरक्षित देखना चाहती है। उसके लिए देश में कितने फसाद हो कितनों की मांग का सिन्दूर छिने देश चाहे जितना आर्थिक पिछड जायें। केवल धर्म ही सुरक्षित रहें। अगर यह सब चलता रहा तो देश कहां जायेंगा, देश का क्या होगा कुछ नही कहा जा सकता। आखिर में जुम्मन देश की जनता को यह गर्व मर्म रुप से कहते हैं- हमें धार्मिक उन्माद को जिन्दा रखना है इसी से देश में दिशा व दशा तय होती है। जय हो धार्मिक उन्माद की।


डा0 फखरे आलम खान
अमता हाउस, जैदी नगर सोसाईटी, मेरठ
(लेखक अक्षय गौरव पत्रिका में प्रधान संपादक है।)


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Akshaya Gaurav

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