चलो एक बार फिर से नयी दुनिया बनाते हैं
चलो एक बार फिर से नयी दुनिया बनाते हैं, 
अपने ख्वाबों में मोर के पंख
लगाते हैं, आये जो गम का सितम तो,
मुस्कुराकर हम मोर संग ही ठुमका लगाते हैं׀

चलो एक बार फिर से नयी दुनिया बनाते हैं, 
हमारे जज्बातों में मोहब्बत की
तासीर होगी, हमारे खुशीयों में हम
दोनों के साँसों की ताबीर होगी, जो चले
हम-तुम संग-संग वो मेरे हमराज,
हमारी, जिंदगी में मुस्कान के बादल,
तो कभी खुशीयों की बरसात होगी׀

चलो एक बार फिर से नयी दुनिया बनाते हैं, 
तुम रखना कदम मेरे आगन में,
जैसे फुलों पे भौरों का गुँजन, तुम देना साथ मेरा,
जैसे तिलक के लिये साथ देता है चंदन׀

चलो एक बार फिर से नयी दुनिया बनाते हैं,
देखना तुम ख्वाब, जिंदगी के,
मै, ख्वाब तुम्हारे पलकों के सच करूँगा,
जब तुम देखेगी चौथ के चाँद,
तेरे माथे पे कुमकुम सौभाग्य के,
और तुम्हारी आँखो में, नजर मैं आउँगा,
चलो एक बार फिर से नयी दुनिया बनाते हैं׀


आशीष कमल
सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष
योजना एवं वास्तुकला विद्यालय,
विजयावाड़ा , आन्ध्र प्रदेश
Mob. 09440614701
E-Mail- asheesh_kamal@yahoo.in


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Akshaya Gaurav

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