आज कुछ लोग अपनी राजनीति चमकाने के लिए ऐसे मुद्दो का चयन कर रहे है, जिनसे हस्तिनापुर विनाश के कगार पर पहुंच चुका है। जिसका कोई हल नही है। आज कुछ लोग हस्तिनापुर में मामा शगुनी की भूमिका में है। मामा शगुनी ने हस्तिनापुर का क्या हर्ष किया था, यह बात कोई छुपी नही हैं।  प्रधान जी आज आप को सुबह-सुबह महाभारत की कैसे याद आ गई, और वह भी मामा शकुनी की। मुखिया जी, मामा शकुनी का प्रतिशोध यही था कि उसकी बहन को उनकी इच्छा के विरुद्ध पिता भीष्म उठाकर ले गये थे और ध्रष्टराष्ट्र से उसका विवाह सम्पन्न करा दिया। मामा शकुनी ने इसी का प्रतिशोध हस्तिनापुर सिंघासन से निकाला। आज कुछ स्वार्थी मामा शकुनी के रिश्तेदार मामा शकुनी के माार्ग पर चलकर हस्तिनापुर पाने के लिए जनता को दो वर्गो में बाटकर विशेष वर्ग से नफरत फैलाकर सत्ता तक पहुंचना चाहते हैं। आज हस्तिनापुर में जगह-जगह इन्ही घटनाओ का सहारा लेकर हस्तिनापुर को साम्प्रदायिकता की भटटी में झोककर उसे सत्ता पाने का मार्ग समझ रहे हैं। हस्तिनापुर की जनता इनके धोखे में एक बार आ चुकी हैं। अब दौबारा नही आयेगी। हस्तिनापुर की जनता आने वाले समय में अपना मत सोच समझकर ही सरकार की भूमिका के लिए देगी।
मुखिया जी हस्तिनापुर की जनता अभी इतनी समझदार नही हैं, जितनी आप समझ रहें है। हस्तिनापुर की जनता भावना में बहकर ही फैसले लेती है,जिसका खामियाजा वह बाद में भुगतती है। यह खेल हस्तिनापुर में हमेशा से ही खेला जाता रहा है, और आज भी जारी है। इसी नफरत के कारण हस्तिनापुर का विभाजन हुआ। हमें पता है ऐसे खेल राष्ट्र के लिए घातक है। इन सब से राष्ट्र में नफरत फैलेगी। परन्तु कुछ लोग सत्ता की लालसा में आपसी सौहार्द दाव पर लगा रहें है। आज इनका साथ देने के लिए आज की प्रिन्टमीडिया, इलेक्ट्रोनिक मीडिया ऐसी खबरो को नमक मिर्च मसाला लगा कर चौबीस घन्टें इन खबरों का गुणगान करती रहती है। हम हस्तिनापुर को कहां ले जा रहें है? आज शहरों की ओर नजर डाले तो इन झगडों की वजह से शहर का कारोबार ढप सा हो गया है, शहर में देहात का आदमी आते हुए डरता है। जहां सडको पर जाम लगा रहता था,आज वहां सुनसान है।
पिछले एक महीने से शहर में हर व्यपारी हाथ पे हाथ रख्कर बैठा है। अर्थव्यवस्था चरमरासी गई है। अगर आप वाकई हस्तिनापुर के हितैषी है, तो उसके उत्थान की सोंचें। ऐसी घटनाएं आदि काल से होती आई है, जिनका जिक्र हमारे धार्मिक ग्रन्थों में आसानी से मिल जाता है। यह ग्रन्थ हमें शिक्षा देने के लिए है, और ऐसी घटनाओं से सावधान करने के लिए है। हम अगर वास्तव में हस्तिनापुर के हितैषी है तो हमें मामा शकुनी का रोल अदा नही करना चाहिए, हमें महात्मा विधुर की तरह अपनी राय रखनी चाहिए, चाहें वह बात कितनी कडवी क्यो न हो। तभी हमारा हस्तिनापुर सुरक्षित रह सकता है। 
आज हम सत्ता को हासिल करने के लिए कन्या का सहारा लेकर विशेष समुदाय में नफरत पैदा करके ऐसा तुच्छ मार्ग तलाश रहें हैं जो हमें विनाश की ओर ले जा रहा है। हमें केवल राष्ट्र की उन्नति एवमं सर्वजन हिताय की बात करनी चाहिए। सर्वजन हिताय में ही राष्ट्र की प्रगति है। एक समुदाय के उत्थान के लिए दूसरे समुदाय का गला घोटना बन्द करना चाहिए। इतिहास साक्षी है जिन लोंगों ने हस्तिनापुर में प्यार के नाम की संज्ञा जिस प्रकार परिभाषित की है, वह वास्तव में शर्मनाक है। हमें इसकी घोर निन्दा करनी चाहिए। विरोध अगर करना है तो आर्थिक गलत नीतियों का विराध करके अपनी बात जनता के बीच में पहुंचानी चाहिए, ना कि प्रतिशोध की गन्दी राजनीति की। आओ आज दृढ निश्चिय करें कि हम एक दुसरे की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए राष्ट्र को प्रगति के मार्ग पर लाने का दृढ संकल्प करेंगें।



डा. फखरे आलम खान (एडवोकेट)
जैदी नगर सोसायटी, मेरठ शहर, उत्तर प्रदेश।
(लेखक अक्षय गौरव पत्रिका के प्रधान संपादक है अब तक इनके लेख एवं रचनाएं कई अखबारों एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित हा चुके है इसके साथ ही इनकी कई पुस्तके प्रकाशित हो चुकी है।)


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Akshaya Gaurav

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