कोइ है जो मेरे सिने में, धड़कन की जगह धड़कता है, मेरी आँखो में रौशनी बन उभरता है I


कोइ है जो मेरे सिने में, धड़कन की जगह धड़कता है,
मेरी आँखो में रौशनी बन उभरता है 

मेरा जीवन, उसकी आँचल से है प्रस्फुटित,
मेरा मस्तिष्क, उसकी ममता से है सुरक्षित 

मेरे लहू में उसका ही, हो रहा है रक्तों का संचार,
मेरी रूह पर सिर्फ, उसका ही है अधिकार 

मेरे ह्र्दय में उसकी तस्वीर है प्यारी,
नित्य उसके दर्शन करता मैं

उसके चरणों में है मेरी दुनिया सारी ,
वो ममतामयी, स्नेहमयी; है सबसे न्यारी,
पुत्र हुँ मैं उसका, और वो माँ है हमारी 



आशीष कमल
सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष
योजना एवं वास्तुकला विद्यालय, 
विजयावाड़ा, आन्ध्र प्रदेश
Mob. 09440614701
E-Mail- asheesh_kamal@yahoo.in


Axact

Akshaya Gaurav

hindi sahitya, hindi literature, hindi stories, hindi poems, hindi poetry, motivational stories, inspirational stories, हिन्दी साहित्य, कहानियाँ, हिन्दी कविताएँ, काव्य, प्रेरक कहानियाँ, प्रेरक कहानियाँ, व्यंग्य.

loading...

POST A COMMENT :