मोहब्बत की दीप, खुशीयों की घी, सपनों की बाती होगी, रंगोली से श्रृंगार, और स्नेह हमारी साथी होगी ।



मोहब्बत की दीप,
खुशीयों की घी,
सपनों की बाती होगी,
रंगोली से श्रृंगार, 
और स्नेह हमारी साथी होगी ।

घर के चौखट पर,
पिता के हाथों की छाया,
आँगन में माँ की आँचल होगी,
झीलमिलाती खिलेंगी फुलझड़ीयाँ,
इठलाती भाभी की पुड़ीयाँ होगीं ।

जब आयेंगे भगवान लक्ष्मी-गणेश,
रिश्तों का बन्धन, मर्यादाओं की चन्दन होगी,
अश्रुपुष्प होंगे और ह्रदय से वन्दन होगी ।

चाँद भी अमावस में निकल आयेगा,
जब देखेगा हर आँगन में,
कुछ ऐसा ही;
गणेश-लक्ष्मी के साथ  माँ- पिता की,
इस दीपावली, घर-घर पूजन होगी ।


 
 आशीष कमल
सहायक पुस्तकाल्याध्यक्ष व लेखक
योजना तथा वास्तुकला विद्यालय, विजयवाड़ा,
आन्ध्र प्रदेश
E-mail-asheesh_kamal@yahoo.in


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Akshaya Gaurav

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