दादा - दादी 

बात हो गई अब ये पुरानी
जब दादी सुनाती थी कहानी
दादा के संग बागों में खेलना
रोज सुबह शाम सैर पर जाना

भरा पूरा परिवार था प्यारा
दादा दादी थे घर का सहारा

बात हो गई अब ये पुरानी
संयुक्त परिवार की ख़त्म कहानी
दादी की कहानी ग़ुम है
दादा जी अब कमरे में बंद है
गुमसुम हो गई उनकी जवानी
बुढ़ापे ने छिनी उनकी रवानी
बच्चे अब नहीं उनको चाहते
बोझ जैसा अब उन्हें मानते
रोज गरियाते झिझकाते है
बूढ़े माँ पिता को सताते है
एक समय की बात ख़त्म हुई
दूजे समय ने की मनमानी।
बात हो गई अब ये पुरानी
संयुक्त परिवार की ख़त्म कहानी

सोन चिरैया 

बाबुल की सोन चिरैया
अब बिदा हो चली
महकाएगी किसी और का आँगन
वो नाजुक सी कली
माँ की दुलारी
बिटिया वो प्यारी
आँसू लिए आँखों में
यादें लिए मन में
पिया घर चली
ओ भैय्या की बहना
ख्याल अपना रखना
मुरझा ना कभी जाना तू
ओ प्यारी सी कली
ले जा दुआएँ
और ढ़ेर सारा प्यार
बिटिया तेरे जीवन में आए
खुशियों की फुहार
पिया घर सजाना
तू पत्नी धर्म निभाना
खुश रहना तू मेरी बिटिया
ना होना कभी उदास





लेखिका : रीना मौर्य
(लेखिका एक शिक्षिका है)
निवास स्थान - मुंबई, महाराष्ट्र
ब्लॉग - mauryareena.blogspot.com


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Akshaya Gaurav

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