आँखो की पलकों से तुम्हें देखा,
दिल की हर नजर से तुम्हें देखा,
चाहत की बात ना कर,
अपने सिने की हर धड़कन से तुम्हें देखा।

यूँ हमसे दुर ना जा– साँसे तेरे सँग चली जाती है,
आ मेरे साथ आजा – दुर रहने पर मेरी साँसे, रूक सी जाती है ।
यादों के दरम्यान एक आशीयाँ मैं; बनाया हुँ,

तुझको अपने सिने से मैं; लगया हुँ,
तेरे सँग एक ख्वाब मैं; सजाया हुँ,
मन ही मन तुम्हें दुल्हन मैं; बनाया हुँ ।

सावन की रिमझिम फुहरों मे तुम्हें देखा,
बादल की ठंडी बुँदो में तुम्हें देखा,
प्यार की बात ना कर,
अपनी धड़कन की हर धड़कन से तुम्हें देखा ।

सपने मेरे टुट ना जाये,
इसलिये अपनी आँखो को बँद करके रखा है,
तु हमसे दुर ना हो जाये,
इसलिये तेरी तस्वीर पर, सिंदूर लगा के रखा है ।





आशीष कमल
सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष
योजना एवं वास्तुकला विद्यालय,
विजयावाड़ा, आन्ध्र प्रदेश
E-Mail- asheesh_kamal@yahoo.in






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Akshaya Gaurav

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