तुम्हारे पलकों पर जब भी आयेगी आँसू,
वो हमेशा खुशीयों की होगी,
तुम्हारी आँखे देखेगी ख्वाब, पूरा करूँगा मैं।

तुम्हारी उम्मीद बनकर, बचपन मेरी,
तुम्हारे गोद में खेला था,
बड़ा होकर तुम्हारी उम्मीद पूरा करूंगा मैं,
जब भी तुम रात को उठेगी पानी की तलाश में,
अपने हाथों से तुम्हें पानी पिलाउँगा मैं।

ऐ माँ वादा है मेरा तुमसे;
तुम्हारी आँखों की रौशनी बनकर,
तुम्हारे जीवन में ज्योत जलाउँगा मैं,
तुम्हारे कंपकपाते अधरों पर मुस्कान लाउँगा मैं,
पिता और तुम्हारे नाम को चाँद पर सजाउँगा मैं।

मेरी दुनिया तुमसे है,
तुम्हारे चरणों में नित्य अपना शीश झुकाउँगा मैं,
एक दिन तुम्हें, माँ होने का गर्व कराउँगा मैं,
वादा है मेरा तुमसे  माँ;
एक दिन तुम्हें, माँ होने का गर्व कराउँगा मैं।




आशीष कमल
लेखक योजना तथा वास्तुकला विद्यालय, विजयवाड़ा,
आन्ध्र प्रदेश में सहायक पुस्तकाल्याध्यक्ष के पद पर
 कार्यरत हैं तथा अक्षय गौरव पत्रिका के उप-संपादक भी है।
E-Mail- asheesh_kamal@yahoo.in



© उपरोक्त रचना के सर्वाधिकार लेखक एवं अक्षय गौरव पत्रिका पत्रिका के पास सुरक्षित है।


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Akshaya Gaurav

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