अब्दुल समद राही
सोजत सिटी, राजस्थान।

 सुल्ताने हिन्द हजरत ख्वाजा मुईनुद्दीन हसन संजरी चिश्ती(गरीब नवाज)अजमेरी रहमतुलाह अलैह सन् 537 हिजरी संजर में पैदा हुए। ख्वाजा गरीब नवाज के पिता का नाम ख्वाजा गयासुद्दीन हसन रहमतुलाह अलैह है। वह माता बीबी उम्मुल वरज है। आप पिता की तरफ से हुसैनी और माँ की तरफ से हसनी सैय्यद है।
       आप की वालदा (माँ) हजरत बीबी उम्मुल वरज कहती थी के जिस वक्त से मेरा लाडला मुईनुद्दीन मेरे पेट में आया मेरा घर खुशहाल नजर आने लगा जो लोग हमारे दुश्मन थे वोह मोहब्बत से पेश आने लगे। कई बार मुझे बेहतरीन ख्वाब नजर आते थे। जिस वक्त ईश्वर ने आप के जिस्म में जान डाली तो उस वक्त से ये मामूल हो गया के आदि रात से लेकर सुबह तक मेरे शिकम(पेट) से तस्बीह (माला) की आवाज आती थी। उस मुबारक आवाज से मैं खुश हो जाती थी जब आप पैदा हुए तो मेरा सारा घर नूर(रोशनी) से भर गया।
 आप एकता पे्रम व भाइचारा का संदेश लेकर हिन्दुस्तान आये। ख्वाजा गरीब नवाज रहमतुलाह अलैह ने अपने हुश्न अखलाख पे्रम मोहब्बत  का संदेश देकर लाखो की तकदीरे बदल कर रख दी।
      एक बार एक आदमी हजरत ख्वाजा गरीब नवाज को कत्ल करने के इरादे से आया। हजरत ने उसकी नीयत भांप ली। जब वोह आपके करीब आया तो आपने उसके साथ निहायत नरमी से फरमाया, भाई तुम जिस नीयत से आए हो उसको पूरा करो मैं तुम्हारे सामने मौजूद हूँ। ये सुन कर उस आदमी का बदन कांपने लगा और वोह आपके कदमों में गिर पड़ा। फिर कहने लगा कि मुझको लालच देकर आपको कत्ल करने के लिये भेजा था। उसी मकसद के लिये मैं ये छुरी अपनी बग़ल में छुपा कर लाया हूँ। अब ख्वाहिश है के इसी छुरी से आप मेरा काम तमाम कर दें ताके मैं अपनी बदनियती की सज़ा को पहुंचू। ख्वाजा गरीब नवाज ने फरमाया मुसलमानों का तरीक़ा तो ये है के जो उनके साथ बुराई करते है वोह उसके साथ भी नेकी व भलाई करता है। ये फरमाकर उसको गले से लगा लिया और उसके ह़क में दुआए खैर (प्रार्थना) की। उस आदमी पर गरीब नवाज के बुलन्द अखलाक का इस क़द्र् असर हुवा के उसी वक्त आपके हाथ पर तौबा कर ली और दिन रात आपकी खिदमत में रहने लगा। गरीब नवाज की सोहबत ने उसको पत्थर से हीरा बना दिया और वो आदमी 45 बार हज्जे बैतुल्लाह से मुशर्रफ हुवा।
      प्यारे भाईयों आपने मुलाहिजा फरमाया के हुजूर ग़रीब नवाज रहमतुल्ला अलैह के अजीम अखलाक और मोहब्बत भरे अन्दाज नजरे फैजे असर ने किस तरह एक कातिल को अल्लाह की रहमत में घायल करके प्यारे मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम के कदमों में डाल दिया और एक नेक व भलाई करने वाला बना दिया। इस तरह आप के अखलाख और भलाई के कई वाकियात मोजूद है। आप की बताई राह पर चलकर लोगो ने अपनी जिन्दगी को खुबसुरत बनाया है। आज आप के चाहने वाले सभी धर्मो के अनुयायी है। आपके दरबार में हमेशा मेला सा लगा रहता है। लोग अपनी मन की मुरादे पाकर सकुन की जिन्दगी जी रहे है।       


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Akshaya Gaurav

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