नैनो का नाम लेते ही कार की याद आ जाती है। सबसे छोटी और सबसे सस्ती कार जो ना अब सस्ती रही और ना छोटी। आजकल बदलाव तो तेजी से आ रहा है चाहे जीवन का कोई भी क्षेत्र हो। पहले चलने वाले बड़े और भारी भरकम टीवी, मोबाइल फ़ोन और कंप्यूटर छोटे, हलके और सुंदर होते जा रहे हैं। छोटे या नन्हें या नैनो होते जा रहे हैं। ग्रीक भाषा से लिए गए इस शब्द 'नैनो' का मतलब है छोटा। अब नैनो का मतलब छोटा तो है पर कितना छोटा है ये नापने के लिए नैनो मीटर की परिभाषा भी बना दी गई - एक मीटर का एक अरब-वां भाग एक नैनो मीटर कहलाता है।
गणित में इसे यूँ लिखेंगे: 10−9
आँख से तो देख नहीं सकते नैनो मीटर के बराबर की चीज़ को पर अंदाजा लगाने की लिए कुछ मजेदार उदाहरण हैं :
  • एक इंच में दो करोड़ चौव्वन लाख नैनो मीटर हैं।
  • अगर खेलने वाला एक कंचा एक नैनो मीटर का है तो पृथ्वी एक मीटर की होगी!
  • एक और मजेदार तुलना देखिए। पुरुष की दाढ़ी 24 घंटे बढ़ती रहती है. और रोज ही उस्तरा चलता है. अब अगर किसी महानुभाव ने उस्तरा उठाया और गाल पर लगाया तो इस दौरान दाढ़ी एक नैनो मीटर बढ़ गई होगी !
हमारा शरीर, खाना, कपड़े यहाँ तक की ये धरती सभी छोटे छोटे अणु परमाणु से बने हुए हैं जो आँखों से देखे नहीं जा सकते। देखने के लिए अगर औजार हों तो बहुत सी चीजें देखी समझी जा सकती हैं और बहुत सी फायदेमंद चीज़ें की भी जा सकती हैं। इस ओर वैज्ञानिकों ने लगभग 30 साल पहले काम शुरू किया था। पहले STM याने scanning tunneling microsope आया फिर AFM याने atomic force microscope आया तो नैनोविज्ञान और नैनोटेक में काम चल पड़ा। नैनोटेक या नानो टेक्नोलॉजी को यूँ परिभाषित किया गया की है कि 1 नैनो मीटर से 100 नैनो मीटर तक के पदार्थ की इंजीनियरिंग या जुगाड़ बाजी। नैनोटेक से बने खेलकूद के सामान, साइकिलें, शीशे के सामान हलके फुल्के और ज्यादा मजबूत हैं। कई तरह के रसायन भी नैनोटेक से बनने लगे हैं।
अमरीका ने 2001 से अब तक नैनो विज्ञान और नैनो टेक पर 24 अरब डॉलर लगाए हैं। यूरोपियन सरकारें भी R&D में काफी पैसा लगा रही हैं जिससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह विषय महत्वपूर्ण है और आगे आने वाले समय में नैनोटेक का बहुत उपयोग होगा।


सागर तट पर बादल, कन्याकुमारी 
अब बात करते हैं नीनो की। नीनो / एल नीनो / अल नीनो / अल निनो यह स्पेनी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है छोटा या नन्हा बालक। दक्षिणी अमरीका के देश पेरू और इक्वाडोर प्रशांत महासागर के किनारे बसे हैं। वहां के मछुआरों ने अल नीनो का अर्थ नन्हा ईसा या शिशु क्राइस्ट लिया हुआ है क्यूंकि अल नीनो का प्रभाव क्रिसमिस के दिनों में ही देखा जाता है।
क्रिसमिस के आस पास के दिनों में प्रशांत महासागर के तल के तापमान में बढ़ोतरी और साथ ही वायु मंडल में बदलाव आता है। इस घटना को अल नीनो कहा जाता है। परन्तु यह परिभाषा जरूरत से ज्यादा सरल हो गई। प्रशांत महासागर, किनारे की जमीन याने दक्षिणी अमरीका और समुद्री हवा का तापमान, दबाव और स्पीड के सम्बन्ध जटिल हैं। और यह किसी विशेष समय पर होने वाली एक घटना न होकर बहुत सी घटनाओं का मिश्रण है। आजकल अल नीनो का अर्थ इन घटनाओं से विश्व के मौसम का बदलाव माना जाता है। यह अल नीनो हर साल न होकर कई सालों के अंतराल में होता है।
अल नीनो याने गर्म जलधारा और समुद्री हवाओं का असर ऑस्ट्रेलिया, फिलिपीन्स होते हुए इंडोनेशिया और भारत तक पहुँच जाता है। इसके गर्म होने के कारण मानसून भी कमजोर पड़ जाता है और बारिश कम हो जाती है। बारिश कम होती है तो खेती खराब होती है और महंगाई बढ़ जाती है। रिज़र्व बैंक ब्याज दर बढ़ा देता है। हमारे होम लोन की किश्त बढ़ जाती है।

लो कर लो बात अल नीनो की!
पानी नीचे की ओर बदल ऊपर की ओर, जोग फाल्स, कर्णाटक। अल नीनो का विपरीत है ला नीना याने ठंडी जलधारा। अल नीनो अगर सागर पुत्र है तो ला नीना सागर पुत्री। ये सागर की संतानें विपरीत स्वभाव की हैं और इनका प्रभाव भी विपरीत ही होता है। ला नीना में प्रशांत महासागर की सतह का तापमान 2 से 5 डिग्री तक कम हो जाता है। ला नीना आर्द्र याने humid मौसम लाती है जिसकी वजह से उत्तरी अमरीका, इंडोनेशिया और आस पास बारिश बढ़ जाती है। भारतीय मानसून भी प्रभावित होता है और ज्यादा बारिश लाता है।
ला निना भी स्पेनिश भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है नन्हीं बालिका। परन्तु ला नीना कई बार भयंकर बारिश और बाढ़ का भी कारण बन जाती है।
अल नीनो और ला नीना का कोई निश्चित समय नहीं है। ये भी जरूरी नहीं की अल नीनो के बाद ला नीना ने आना ही है। इन दोनों धाराओं का अध्ययन 1960 के बाद से शुरू हुआ था और इनसे विश्व के मौसम की बेहतर जानकारी मिलने लगी है।
चलिए हम तो इस मानसून में ला नीना का स्वागत करेंगे। बारिश ज्यादा आये, खेती का उत्पादन बढ़े तो मंहगाई घटे और मंहगाई घटे तो पूरे देश का कल्याण हो।




हर्ष वर्धन जोग
लेखक पंजाब नेशनल बैंक में कार्यरत है। इसके साथ ही कइ वर्षो से ब्लॉग की दुनिया में सक्रिय ब्लॉगिंग कर रहे है। लेखक से  ई-मेल jogharshwardhan@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।


© उपरोक्त रचना के सर्वाधिकार लेखक एवं अक्षय गौरव पत्रिका पत्रिका के पास सुरक्षित है।


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Akshaya Gaurav

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