तुझे अपनी कहू ये अधिकार नही मेरा...
तुझे अपनी ना कहु यह स्वीकार नही मेरा...

वक्त का तकाजा हे जो तू मुझसे दूर है...
फिर भी तू ही तो मेरे दिल का नूर है...

जब पूछता हूँ स्वयं से मेरा कौन है तू...
चैहरे पर एक मुस्कान आ जाती है, मेरी परछाई तो है तू...

एक अश्क कोे सागर में कोई ढूंढ नही पायेगा...
मेरी चाहत है तू उतनी जिसे तू भी परख नही पायेगा...

उस ख़याल पर मुझे अकसर प्रेम आ जाता है...
जिसमे जिक्र तेरा  बार - बार आ जाता है...

तुम अगर हाथो की लकीरों में नही आई हो...
तो फिर मेरे दिल की धड़कनों में तुम कैसे समाई हो...

तुझे ना चाहू इस पाबन्दी पर भी अब अधिकार नही मेरा...
" रमेश " अब इस नादान दिल की सरहदों पर भी अधीकार नही मेरा...




रमेश प्रजापति
लेखक पत्रकारिता से जुड़े हुए है और सरदारपुर जिला धार (म.प्र.) के रहने वाले है।
लेखक से मोबाइल नंबर 077488 77116 और  ई-मेल rprajapati19395@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।



© उपरोक्त रचना के सर्वाधिकार लेखक एवं अक्षय गौरव पत्रिका पत्रिका के पास सुरक्षित है।


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Akshaya Gaurav

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