दिल में उमंगों के फूल खिल गये,
वफा के संग आज वफा मिल गये,
यूँ तो जिन्दगी गुजरती थी, तन्हाई के गुलिस्ताँ में,
अब तो ऐसा लगता है,
जैसे, नयी जिंदगी मिल गयी हमें ।
उसके होठों की मुस्कान लगती है प्यारी,
उसके चेहरे की रौशनी से,
आफताब है मेरी दुनिया सारी,
जी चाहता है अपने पलकों में छुपा लूँ उसे,
अपने दिल की धड़कन बना लूँ उसे,
मेरे शरीर में चलती रहे वो सांसे बनकर,
और, अपने हाथों से मेंहदी लगा दूँ उसे,
जिसकी कल्पना में है इतनी ताजगी,
जी चाहता है,
सच में अब अपना बना लूँ उसे।





आशीष कमल
उप-संपादक
लेखक योजना तथा वास्तुकला विद्यालय, विजयवाड़ा,
आन्ध्र प्रदेश में सहायक पुस्तकाल्याध्यक्ष के पद पर
 कार्यरत हैं
E-Mail- asheesh_kamal@yahoo.in


© उपरोक्त रचना के सर्वाधिकार लेखक एवं अक्षय गौरव पत्रिका पत्रिका के पास सुरक्षित है।


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Akshaya Gaurav

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