विद्धवान लोगों का मानना हैं जीवन में तरक्की और खुशहाली बनाऐ रखनें के लिये बदलाव बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता हैं। आज अगर समाज के माहौल को देखा जायें तो हमारे चारों और का सामाजिक वातावरण वैसा नही बन पा रहा जैसा कि एक आम शांति पसंद नागरिक चाहता हैं। समीक्षय पुस्तक "बदलाव - जिओ और जीने दो" जे.पी.एस. जौली (जौली अंकल) की 25 वी पुस्तक हैं। हर सभ्य नागरिक समाज में अमन और शांति के महौल की कामना करता हैं। एक बात तो हम सभी जानते हैं कि जब भी किसी मजबूत इमारत का निर्माण करना हो तो सबसे पहले उसकी नींव को मजबूत बनाया जाता हैं। इसी तरह आधुनिक समाज और देश को महान बनाने के लिये शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों और नेक संस्कारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं।
अच्छे संस्कार सिर्फ एक व्यक्ति की तरक्की में ही नही बल्कि सारे समाज और देश को विकसित करने में सहायक सिद्ध होते हैं। यह सच हैं कि हम सभी अपने समाज और देश को प्यारा और न्यारा बनता हुआ देखना चाहते हैं। लेखक का मानना हैं कि ऐसा तभी मुमकिन हो पायेगा जब हम युवाओं को ज्ञान के साथ नेक संस्कारों की वसीहत भी देगे। इसी के साथ हम सभी को मजबूत इरादों के साथ सकारात्मक बदलाव की इस विचाराधारा को घर-घर तक भी पहुंचाना होगा।
इस पुस्तक के 31 अध्यायों में जिंदगी के हर रंग से साक्षात्कार होता है। छोटे-छोटे वाक्यों में समाज की सोच बदलने की ऊर्जा संचित है। पूरे विश्वास के साथ कहा जा सकता हैं यह पुस्तक अपनी विशिष्ट शैली से समाज में सकारात्मकता का मार्ग प्रशस्त करेगी। जो काम बड़े-बड़े गूढ़ ग्रन्थ नहीं कर पा रहे हैं उसे यह सहज-सरल पुस्तक कर सकती है। इस प्रयास के लिए लेखक सच में बधाई के हकदार हैं। इस पुस्तक का सर्वत्र स्वागत होगा और इसका हर शब्द अपना प्रभाव प्रदान करेगा।

पुस्तक : बदलाव - जिओ और जीने दो
लेखक : जे.पी.एस.जौली (जौली अंकल)
पृष्ठ संख्या : 200
मूल्य : 150 रूपये मात्र
प्रकरशक : प्रमोद पब्लिकेशन, बी-3/77 दूसरी मंजिल, सफदरजंग एनक्लेव, नई दिल्ली - 110029


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Akshaya Gaurav

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