मैं जी रहा हूं
अपने ख्वाब के लिये,
अपने शोहरत और जज्बात के लिये,
और मेरा दिल धड़कता है,
अपनों के इंसाफ के लिये।

किताबें मेरी हमराज हैं,
सम्राट अशोक मेरे आदर्श के सरताज हैं,
मेरी आखों में भावुकता के आँसू, 
और नवीनता के आगाज है,
ह्र्दय में ईश्वर और मस्तिष्क में नमाज है।

क्षमा-दया और स्नेह-प्रेम ये चार स्तंभ मेरे व्यक्तित्व के,
मेरी जिन्दगी इनसे आफताब है,
जैसे नाम का अर्थ मनुष्य के अवसंरचना का सूचक,
वैसे ही मेरा नाम आशीर्वाद हैI

पिता की छाया और माँ की काया हूं मैं,
शिक्षक का आशीष और मित्र का साया हूं मैं,  
मोहब्बत मेरी शब्दों की तासीर,
और, इनसे बनकर; प्यारा हूं मैं।




आशीष कमल
उप-संपादक
लेखक योजना तथा वास्तुकला विद्यालय, विजयवाड़ा,
आन्ध्र प्रदेश में सहायक पुस्तकाल्याध्यक्ष के पद पर
 कार्यरत हैं
E-Mail- asheesh_kamal@yahoo.in


© उपरोक्त रचना के सर्वाधिकार लेखक एवं अक्षय गौरव पत्रिका पत्रिका के पास सुरक्षित है।


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Akshaya Gaurav

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