मैं अभी अभी दुनिया में आया हूँ 
अभी अभी मेरा जनम हुआ है 
अभी अभी मैं पैदा हुआ हूँ
और मैं चाहता हूँ 
कोई मेरे कानों में अज़ान न फ़ूँके
कोई संस्कृत के मन्त्र न पढ़े
रख दो मुझे खुली हवा में
सुनने दो बहती हवा
चिड़ियों की चहचहाहट 
मेरे माथे से मत छुआओ  
गीता, रामायण, क़ुरान 
सबसे पहले देख लेने दो
मुझे खुला आसमान 
क्या मुझे इसकी आज़ादी मिलेगी? 

मैं चाहता हूँ
तुम मेरा कोई नाम भी न रखना
नाम रखते ही
मैं तुम्हारी जागीर हो जाऊँगा 
नाम रखते ही
मैं मिट जाऊँगा
बँट जाऊँगा
कट जाऊँगा
मैं पूरा का पूरा जैसा आया था  
वैसा ही रहना चाहता हूँ 
मैं जो हूँ
मुझे वही रहने देना 
मुझे झूठ-मूठ की
कोई पहचान न देना 
क्या मुझे इसकी आज़ादी मिलेगी? 

मैं ये भी चाहता हूँ  
कि मुझे कोई क़िताब  
न दी जाए पढ़ने के लिये  
मेरा किसी स्कूल में
नाम भी न लिखवाओ 
मैं दुनिया को 
अपनी आँखों से देखना चाहता हूँ 
अपने क़दमों से चलना चाहता हूँ 
थक जाऊँ तो बैठना चाहता हूँ 
क्या मुझे इसकी आज़ादी मिलेगी? 

तुम मुझे कोई तरीक़े न सिखाओ 
तुम मुझे कोई सलीके न बताओ
मैं अपने हाथ-पैर
अपनी समझ से हिलाना चाहता हूँ 
मैं पंख लगाकर 
परिन्दों की तरह उड़ जाना चाहता हूँ 
क्या मुझे इसकी आज़ादी मिलेगी?

मुझे ज़िन्दा रहने के लिये 
मशीनों के सहारे मत छोड़ना 
मेरे हाथों-पैरों में बड़ी ताक़त है
इन्हें मत तोड़ना
मैं जी लूँगा
उसी क़ुदरत के भरोसे 
जिसने मुझे, पेड़-पौधों
और हवा को बनाया है
जिसने बिना किसी क़िताब के
सबको जीना सिखाया है 
मैं खा लूँगा 
हरी घास में मौजूद जड़ी-बूटियाँ 
और ज़िन्दा रहूँगा 
तुम मेरी फ़िक्र मत करना 
क्या मुझे इसकी आज़ादी मिलेगी?

मुझे अपने बने-बनाए साँचे में मत ढ़ालना 
मुझे रिश्तेदारों की उलझन में मत डालना
मुझे जीने देना अपनी साँस के भरोसे
साँस लेना मैं सीख के आया हूँ 
तुम्हारी दुनिया से जो लौट चुके हैं 
उन्होंने मुझे सब बताया है
तुमने परिन्दों के पैर ज़मीन में गाड़ रखे हैं 
परिन्दे जो उड़ने के लिये बने हैं 
उनको पंख इसीलिये मिले हैं 
क्या मुझे इसकी आज़ादी मिलेगी?



Written by
क़ैस जौनपुरी 
E-mail : qaisjaunpuri@gmail.com
Contact : + 91 9004 781 786


Axact

Akshaya Gaurav

hindi sahitya, hindi literature, hindi stories, hindi poems, hindi poetry, motivational stories, inspirational stories, हिन्दी साहित्य, कहानियाँ, हिन्दी कविताएँ, काव्य, प्रेरक कहानियाँ, प्रेरक कहानियाँ, व्यंग्य.

loading...

POST A COMMENT :