ऐसा लगता है मुझे तुमसे प्यार हो रहा है
 तुम्हारी आँखो में मोहब्बत की ताबीर नजर आती है,
तुम्हारे अधरों पर गुलों की लालीमा दिखती है,
और तुम जो इस तरह मुस्कुरा रही हो,
लगता है मेरे सिने से धड़कन चुरा रही हो।

मेरे ह्रद्य की स्पंदन तुम्हारी पलकों के उठने से है,
मेरी साँसो में गति तुम्हारी खुशीयों से है,
वजूद नहीं मेरा तुम्हारे बिना,
और तुम जो इस तरह शरमा रही हो,
लगता है मेरे ख्वाबों को तुम सच बना रही हो।

बेवजह मोहब्ब्त की कलीयाँ नही खिलती,
बेवजह धड़कनों की गति नही बढ़ती,
मेरे नस-नस में तुम्हारे प्रेम का संचार हो रहा है,
ऐसा लगता है कि मुझे तुमसे प्यार हो रहा है।

करूंगा सजदा तुम्हारी बेपनाह मोहब्बत की,
करूंगा इबादत तेरी खुशी और चाहत की,
बस तू उदास न होना कभी जीवन के नभ में,
क्योंकि, तुम ही मेरी जिन्दगी की ज्योत हो।



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आशीष कमल
उप-संपादक
लेखक योजना तथा वास्तुकला विद्यालय, विजयवाड़ा,
आन्ध्र प्रदेश में सहायक पुस्तकाल्याध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं
E-Mail- asheesh_kamal@yahoo.in


© उपरोक्त रचना के सर्वाधिकार लेखक एवं अक्षय गौरव पत्रिका पत्रिका के पास सुरक्षित है।


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Akshaya Gaurav

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