मैं वो धड़कन हूँ, जो तुम्हारे दिल में धड़कता जाऊंगा।
कभी तुम्हारे ख्वाबों में आऊंगा,
क़भी तुम्हारे यादों में आऊंगा,
मैं वो खुशबू हूँ, जो तुम्हारी हर साँसों में घुल जाऊंगा।

कभी तुम्हारे पलकों पर आऊंगा,
कभी तुम्हारे होठों पर आऊंगा,
मैं वो धड़कन हूँ, जो तुम्हारे दिल में ही धड़कता जाऊंगा।
क्योंकि;
मिटा नहीं सकते तुम मुझे अपने जीवन के पन्नों से,
मैं तो खुशियों का शब्द हूँ,
तुम्हारी हर मुस्कान और हर गम में नजर आऊंगा।

कभी तुम्हारे सीने में आऊंगा,
कभी तुम्हारे कानों में आऊंगा,
जब भी मिलोगे किसी के गले से तुम,
मैं आसूँ बनकर तुम्हारे पलकों से नीचे गिर जाऊंगा।

कभी तुम्हारे पास नजर आऊंगा,
कभी तुमसे दूर नजर आऊंगा,
जब भी गुजरोगे तुम अपने घर की गलियों से,
मैं हवा का झोंका बनकर,
तुम्हारे बालों को बिखरा जाउँगा।
और,
तुम जब रखोगे व्रत करवा चौथ का,
देखोगे नीले आसमान को, या दोनों जहाँ को,
मैं चाँद और सितारों में तुम्हें नजर आऊंगा।




लेखक अक्षय गौरव पत्रिका के प्रधान संपादक है और योजना तथा वास्तुकला विद्यालय, विजयवाड़ा, आन्ध्र प्रदेश में सहायक पुस्तकाल्याध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं। आपसे E-Mail : asheesh_kamal@yahoo.in पर सम्पर्क किया जा सकता है।

© उपरोक्त रचना के सर्वाधिकार लेखक एवं अक्षय गौरव पत्रिका पत्रिका के पास सुरक्षित है।


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Akshaya Gaurav

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