आलोचक मैनेजर पांडेय की 'मुग़ल बादशाहों की हिंदी कविता' पर भी परिचर्चा

प्रगति मैदान में चल रहे विश्व पुस्तक मेले के चौथे दिन भी राजकमल प्रकाशन समूह के स्टाल में पुस्तकप्रेमियों में राजकमल प्रकाशन के स्टाल पर 'हिंदी है हम' सेल्फी पॉइंट को काफी उत्साह रहा। कार्यक्रम में आलोचक मैनेजर पांडेय की किताब 'मुग़ल बादशाहों की हिंदी कविता 'पर कवि और आलोचक मृत्युंजय ने बातचीत की। दिन के दूसरे कार्यक्रम में वर्षा दास के तीन  नाटक -खिड़की खोल दो, चहकता चौराहा और प्रेम और पत्थर लोकापर्ण राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की अध्यक्ष रह चुकी कृति जैन द्वारा किया गया। जैसे कि इस साल पुस्तक मेले की थीम मानुषी है इसके मद्देनजर राजकमल प्रकाशन हरदिन महिला लेखिकाओं को अपने मंच में ला रहा है।



विद्वान्-आलोचक मैनेजर पांडेय  ने मृत्युंजय से परिचर्चा करते हुए कहा कि यहां किताब हिंदी साहित्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि सारे मुग़ल बादशाह, बाबर और हुमायूँ को छोड़ कर यानी अकबर से लेकर बहादुर शाह जफ़र तक सबने बृजभाषा में कविता लिखी है और मेरे लिए बहुत ही चकित कर देने वाली बात थी।
मैनेजर पांडेय  की किताब ‘मुग़ल बादशाहों की हिन्दी कविता' यह दर्शाती है कि मुग़ल शासकों में से कई कितने अच्छे कवि थे। यह भी कि भारतीय लोकजीवन में वे बहुत रसे-बसे थे। उनमें अकबर से लेकर औरंगज़ेब तक शामिल हैं। दिलचस्प यह भी है कि ये कविताएं अधिकांशतः संगीत के एक ग्रन्थ ‘संगीतकल्पद्नुम' में संकलित हुई थीं। ज़ाहिर है तब कविता और संगीत में घनिष्ठ संबंध बना हुआ था जो हमारे समय में पूरी तरह से टूट चुका है।  जो लोग हिन्दी कविता के लम्बे इतिहास से परिचित हैं वे इतना तो जानते रहे हैं कि मुग़ल शासनकाल में सत्ता और कलाओं के बीच गहरा संबंध था। प्रायः सभी बड़े मुग़ल शासक कलाप्रेमी और उनके आश्रयदाता थे। पर, कम से कम मुझे, यह पता नहीं था कि उनमें से प्रायः सभी ने स्वयं कविता भी लिखी थी। कविकीर्ति अन्तिम मुग़ल शासक बहादुर शाह ज़फ़र के ही, वह भी उर्दू कविता के लिए, हिस्से आयी है ।


वर्षा दास ने अपनी किताबों के विमोचन पर बोलते हुए कहा कि में बचपन में ही रेडियो से जुडी जहां मुझे नाटकों बाल कलाकार का किरदार करने को मिला, आकाशवाणी काम करते करते ही मुझे नाटक लिखने की प्रेरणा मिली ।

राजकमल प्रकाशन स्टाल पर आज के कार्यक्रम 

4-5 बजे मृदुला गर्ग द्वारा उनकी किताब 'वसु का कुटुम' अंश पाठ तथा पाठकों से बातचीत, 5-6 बजे पुरुषोत्तम अग्रवाल अपने उपन्यास 'नाकोहस' से अंश पाठ और पाठकों से बातचीत करेंगे।


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Akshaya Gaurav

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