25 ग्लोबल ब्रांड किताब, सौ साल से भी ज़्यादा पुराने पच्चीस ब्रांडस से पाठकों को रू-ब-रू करवाती है। किताब मर्क, कोलगेट, थॉमस कूक, पार्कर, हॉर्लिक्स, बाम्बे डाइंग जैसे ब्रांडस के इतिहास में जाकर पाठकों के लिए कई रोचक तथ्यों को सामने लाती है जिससे इन ब्रांड्स के वजूद में आने से लेकर उनके आज की स्थिति को समझा जा सकता है। अपने-आप में प्रेरणादायक ये कहानियाँ न केवल वर्तमान के उपभोक्ता बाज़ार के रूप और अस्त्तीव को समझने में पाठकों की मदद करती है बल्कि ‘कंपनी-टू-कस्टमर’ कल्चर कोड़ को डिकोड करने में भी सहायक हैं।

यह पुस्तक पाठकों को उनके पंसदीदा ब्रांड से, उनके लगाव को मजबूत करती है।  लेखक प्रकाश बियाणी और कमलेश माहेश्वरी ने विश्व के सबसे पुराने 25 ब्रांड्स का इतिहास तथा इनके उद्योग बनने की कहनी को बड़ी रोचक तरह से लिखा है।

हम कोइ ब्रांडेड उत्पाद खरीदते हैं तो केवल वस्तु का मूल्य नही चुकाते। हम उस 'वचन' का मूल्य भी उसके उत्पाद को चुकाते हैं, जो हमें ब्रांड के साथ मिलता हैं। वे ही ब्रांड आज के प्रतिस्पर्धी युग में लंबी पारी खेलते हैं, जो एक बार नही, हर बार हमारे भरोसे को पुख्ता करते हैं। इस पुस्तक का ध्येय इन्हीं कहानियों को पाठको से सामने लाना है। जैसे, लाइफबॉय साबुन बनाने वाले लीवर बंधु 1884 में हर सप्ताह 450 टन साबुन बनाते थे पर फ़िर भी मांग कि पूर्ति नही कर पाते थे।

आजादी के समय हमारे देश में किवदंती थी -'देश का सबसे बड़ा लुहार टाटा और सबसे बड़ा मोची बाटा। वैसे यह संबोधन अटपटा व असंगत लगता हैं ,पर इसमें छुपा हैं टाटा व बाटा के प्रति सम्मान और इसमें समाया हुआ हैं देश का ओधोगिक इतिहास।

थॉमस एल्वा एडिसन  इतने स्कूल की पढ़ाई में इतने पीछे थे कि उन्हें स्कूल से निकाल दिया था। लेकिन, वे प्रयोगों में इतने खोये रहते थे कि खाने पिने कि सुध नही रहती थी। बिजली के बल्ब बनाने में वो हज़ारों बार असफल हुए थे। इस तरह के दिलचस्प 25 ब्रांडो की जन्म की कहानियां आप इस किताब में पढ़ सकते हैं जो अभी ग्लोबल ब्रांड हैं।

'25 ग्लोबल ब्रांड' के लेखकों का परिचय

किशोरावस्था से सतत् लेखन कर रहे प्रकाश बियाणी मूलत: बैंकर हैं। भारतीय स्टेट बैंक में 25 साल (1968-1995) नौकरी करने के बाद वे आठ साल देश के अग्रणी समाचार पत्र समूह 'दैनिक भास्कर’ में कॉर्पोरेट संपादक रहे । देश के औद्योगिक परिदृश्य व उद्योगपतियों पर उनके दो हजार से ज्यादा लेख/साक्षात्कार/समीक्षाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। इस दौरान उन्हें देश के कई अग्रणी उद्योगपतियों से प्रत्यक्ष मुलाकात का सुअवसर भी मिला है एवं राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बिज़नेस मीट/ इवेंट्स में शिरकत करने का मौका भी। इन दिनों वे कार्पोरेट जगत व कंपनी मामलों पर स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। आपकी पुस्तक 'शून्य से शिखर’ (35 भारतीय उद्योगपतियों की यशोगाथा) को पाठकों, खासकर बिजनेस स्कूल के छात्रों ने खूब सराहा है। अपने किस्म की इस अनूठी पुस्तक का द्धितीय संशोधित संस्करण एवं पेपरबैक संस्करण भी एक साल में मार्केट में लांच हो चुके हैं।

किताब का नाम : 25 ग्लोबल ब्रांड : सौ साल बाद भी शिखर पर
लेखक : प्रकाश बियाणी, कमलेश माहेश्वरी
प्रकाशन : राजकमल  प्रकाशन 
वर्ष : 2017
पन्ने : 169  
बाइंडिंग : पेपरबैक
कीमत : 195 
भाषा :  हिंदी 
आईएसबीएन 13: 9788126730001


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Akshaya Gaurav

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