साहिर के जीवन और रचना के कई पहलुओं पर, साथ ही संकलित ग्रन्थ 'साहिर समग्र' पर हुई ढेरों बात


पटना पुस्तक मेले में राजकमल प्रकाशन समूह के स्टाल पर बुधवार का दिन साहिर लुधियानवी को समर्पित रहा। मौक़ा था, साहिर लुधियानवी की वृहत रचनाओं के संसार में घुसकर, उर्दू की लिपियों में बंद लेकिन हिन्दी पट्टी में बखूबी चर्चित साहिर की रचनाओं का उर्दू से हिन्दी में लिप्यान्तरण और सम्पादन कर पाठकों को समर्पित पुस्तक “साहिर समग्र" पर चर्चा का। इस दौरान आयोजित की गयी चर्चा में पुस्तक की सम्पादक आशा प्रभात के अलावा वरिष्ठ साहित्यकार मदन कश्यप, पाखी के सम्पादक और कथाकार प्रेम भारद्वाज, लेखक और पत्रकार अवधेश प्रीत थे।
आशा प्रभात ने अपने अनुभवों को बताते हुए कहा कि इस काम को अंजाम देने में ढाई साल लग गए। चूंकि साहिर खुद अपने निजी जीवन पर कहीं एक शब्द नहीं लिख गए, इसलिए उनके परिचितों और मित्रों के संस्मरणों को खंगालने के अलावा दूसरा कोई तरीका नहीं था, इस पुस्तक के सामने आने का। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और भारत के समकालीन कागजातों, पत्रिकाओं को खूब खंगाला, जिसका अनुभव बहुत रोचक था। साहिर की रचनाओं का पाठ करके, उनके लिखे फ़िल्मी गीतों की बात करके, उसके विभिन्न डायनेमिक्स की चर्चा करते हुए आशा प्रभात ने दर्शकों से अपने अनुभव बांटे।
कथाकार और पाखी पत्रिका के सम्पादक प्रेम भारद्वाज ने कहा कि साहिर का नाम लेते ही अमृता प्रीतम याद आती हैं और अमृता प्रीतम का नाम लेते ही साहिर लुधियानवी। साहिर के ही एक शेर “दुनिया के तज़ुर्बातों हवा की शक्ल में” को पढ़ते हुए उन्होंने कहा कि उनकी निजी जिन्दगी का पूरा फलसफा इस शेर में  छुपा हुआ है। उनकी निजी जिन्दगी के अनछुए पहलुओं पर बात करते हुए प्रेम भारद्वाज ने कहा कि अपने जीवन में साहिर तन्हा ही रहे। दरअसल साहिर ने अपने जीवन में इतनी तल्खी झेली, जिसका सहज ही दर्शन उनकी रचनाओं में किया जा सकता है।
चर्चा को आगे बढाते हुए अवधेश प्रीत ने कहा कि दुनिया साहिर को उनके फिल्मों के लिए गाए गीतों से जानते हैं, लेकिन मुझ जैसे चंद लोग उन्हें अमृता प्रीतम से मिली जानकारियों से जानते हैं। उनकी ही एक शेर “जो साज से निकली है वो धुन सबने सुनी है...” की चर्चा करते हुए उन्होंने इस शेर का सुन्दर पाठ भी दर्शकों के सामने किया।
वरिष्ठ कवि मदन कश्यप ने उपस्थित दर्शकों के समक्ष पुस्तक की सम्पादक आशा प्रभात की तारीफ़ करते हुए कहा कि आपने उर्दू और हिन्दी के बीच सेतु का काम किया है। मदन कश्यप ने कहा कि आज जब भी हम शैलेन्द्र की या साहिर जैसे शायरों की बात करते हैं, तो फिल्मों से बात शुरू होती है और उसी के आसपास ख़त्म भी हो जाती है। लेकिन दरअसल ऐसा होना नहीं चाहिए, इनकी रचनाओं का संसार बहुत ही व्यापक और विस्तृत है। साहिर के साथ शमशेर की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि बदलते समय के लेखन में लोकप्रियता साथ गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि शायरी में एक धार का रूप पकड़ चुकी तुकों की परम्परा से अलग हटकर नई परिभाषाओं को गढ़ने के लिए लेखन जगत उन्हें हरदम याद करेगा।
कार्यक्रम के अंत में राजकमल प्रकाशन समूह के सम्पादकीय निदेशक सत्यानन्द निरूपम ने सभी सुधी श्रोताओं और विद्वान वक्ताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस पुस्तक के बाद इन्हीं सम्पादक आशा प्रभात द्वारा रचित उपन्यास  “मैं जनकनंदिनी” का सीतामढी पुस्तक मेले में मार्च में किया जाएगा।

राजकमल प्रकाशन समूह द्वारा आयोजित आज के कार्यक्रम

समय :  3 बजे से 4 बजे तक, राजकमल प्रकाशन के स्टॉल के सामने, पटना बुक फेयर के प्रांगण में
विनीत कुमार और गिरीन्द्रनाथ झा सुनाएंगे लप्रेक और करेंगे लप्रेकप्रेमियों से खुली बातचीत। श्रोता भी सुना सकेंगे अपनी पसंद के लप्रेक। सुनाने वाले का चयन ऐन मौके पर करेंगे दोनों लप्रेककार।
समय : 4 बजे से 4.30 बजे तक
राजकमल प्रकाशन के स्टॉल के सामने, पटना बुक फेयर के प्रांगण में।
क्षितिज रॉय 'गंदी बात' से पढ़ेंगे चुनिंदा अंश और करेंगे श्रोताओं से सीधी बातचीत।
समय : 4.30 बजे से 5.30 बजे तक
राजकमल प्रकाशन के स्टॉल के सामने, पटना बुक फेयर के प्रांगण में।
पटना शहर के चार विशिष्ट लेखक अपनी इस साल आने वाली किताबों से करेंगे अंश पाठ
अरुण सिंह / पटना : चप्पा-चप्पा शहर ( कथेतर ) / हृषीकेश सुलभ / लीला (उपन्यास) / विकास कुमार झा / गयासुर संधान (उपन्यास) / अवधेश प्रीत / अशोक राजपथ (उपन्यास) / समय : 4.30 बजे से 5.30 बजे तक।


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Akshaya Gaurav

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