जाने क्यूँ? माँ मुझे मरने नहीं देती !
जाने क्यूँ, वो साँसों की डोर टूटने नहीं देती,
बस दो कदम और चलने का वास्ता देकर;
मुझे रूकने नहीं देती।

बात कहती है मुझे हँस-हँस कर जी लेने की,
अजीब शक्स है वो, मुझको चैन से रोने भी नहीं देती।

आज हौसला देती है मुझे, चाँद सितारों को छू लेने की,
लेकिन वो मेरे साथ जाने की, कभी जीद नहीं करती।

जब उदास हो जाता हूँ मैं,
नहीं जाना मुझे बिन तेरे, उन चाँद सितारों पर,
तो उसका प्यारा सा चेहरा, मुझे टूटकर बिखरने नहीं देती।

शायद जानती है वो भी, इन आँखों में आँसूओं का सैलाब है,
जाने क्यूँ, फिर भी वो इन आँसूओं को गिरने नहीं देती।

मुझसे कहती है “मैं तो मर जाउँगी तुम्हारे बिना”,
मैं जिन्दा हूँ अब तक, की वो मुझे मरने नहीं देती। 


लेखक अक्षय गौरव पत्रिका के प्रधान संपादक है अौर आप सामाजिक, साहित्यिक तथा शैक्षिक परिवेश पर लेखन करते हैं। आपसे E-Mail : asheesh_kamal@yahoo.in पर सम्पर्क किया जा सकता है।

© उपरोक्त रचना के सर्वाधिकार लेखक एवं अक्षय गौरव पत्रिका पत्रिका के पास सुरक्षित है।


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Akshaya Gaurav

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