• राजकमल प्रकाशन समूह एवं ऑक्सफ़ोर्ड बुक स्टोर द्वारा आयोजित
  • मेरी ज़िन्दगी में बहुत ही कनफ्यूज़न रहा है : पियूष मिश्रा
  • हिंदी साहित्य उत्सव में युवाओं ने भी बढ़ चढ़कर भाग लिया


नई दिल्ली। रविवार को ऑक्सफ़ोर्ड बुकस्टोर में राजकमल प्रकाशन समूह एवं ऑक्सफ़ोर्ड बुक स्टोर द्वारा एक दिवसीय 'हिंदी साहित्य उत्सव' का आयोजन किया गया, जिसकी शुरुआत मृणाल पांडेय के 'भाषा और समाज' विषय पर व्याख्यान से हुई। भाषा और समाज के अंतर-सम्बन्ध को मृणाल पांडेय ने कई उदाहरणों एवं निजी अनुभवों के माध्यम से रखा। उन्होंने कहा कि भाषा हमें विरासत में मिलती है और एक समाज उसे अपने स्तर पर गढ़ता है। हिंदी समावेशी भाषा है, इसलिए वो अपने अनुसार शब्दों को ले कर चलती है और शब्दों की यह यात्रा बहुत रोचक होती है।
इस दौरान राजकमल प्रकाशन समूह के मुख्य प्रबंधक अशोक माहेश्वरी ने कहा कि यह ख़ुशी कि बात है कि हाल के कुछ वर्षों में हिंदी पुस्तकों और लेखकों में दिलचस्पी लगातार बढ़ी है। यह कार्यक्रम इसी का विस्तार है, ये हिंदी के साथ अन्य भारतीय भाषाओँ के लिए भी एक अच्छा संकेत हैं। हिंदी के मूल सवालों, असल सरोकारों, मूल पाठक समाज तक अभी तमाम साहित्य उत्सवों को और तैयारी से पहुँचने की जरूरत है।
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की सह निदेशक एवं लेखक नामित गोखले ने इस अवसर पर कहा कि हिंदी साहित्य उत्सव का यह दूसरा वर्ष है। इस तरह के साहित्यिक कार्यक्रम से हिंदी पुस्तकों के वितरण को भी काफी प्रोत्साहन मिलेगा। यह हिंदी के लिए और अन्य भारतीय भाषाओँ के लिए भी एक अच्छा संकेत हैं। भाषाओँ के साहित्य की मैत्री की दिशा में उठाया गया यह एक महत्वपूर्ण आयोजन है।
साहित्य उत्सव के पहले सत्र में 'अपनी चुनी राहें, क्या मकसद, क्या हासिल' का संचालन अनु सिंह चौधरी ने किया। इस सत्र में उर्वशी बुटालिया, मैत्रयी पुष्पा, विद्या शाह और पियूष मिश्रा ने अपने अनुभवों को साझा किया। मैत्रयी पुष्पा ने कहा कि मैं लेखिका बनने के लिए ही पैदा हुई, मेरे लिए साहित्य लेखन मतलब जीवन जीना और फिर उसका चित्रण करना है। मेरा रास्ता आसान नहीं था। मेरी ज़िन्दगी की इस जद्दोजहद ने मुझे लगातार लिखने के लिए प्रेरित किया। इसी सत्र में बोलते हुए गीतकार पियूष मिश्रा ने कहा कि मेरी ज़िन्दगी में बहुत ही कनफ्यूज़न रहा है। क्या करना है क्या नहीं, कुछ समझ नहीं आता था, इसलिए मैंने सब कुछ कर के देख लिया और आज मैं मानता हूँ, यही कनफ्यूज़न  मुझे आगे बढ़ाता चला गया और मैं सफ़ल होता चला गया।
कार्यक्रम के अगले सत्र में जानी मानी आर जे सायमा ने मंटो की चर्चित कहानी "सहाय" का  भावपूर्ण तरीके से पाठ किया। इस सत्र के बाद नियोगी ट्रस्ट से जुड़े आयुष्मान जामवाल ने अपने नाना कुंवर वियोगी की लिखी डोगरी कविताओं के हिंदी अनुवाद को पढ़ कर सुनाया।
उत्सव में जहां युवाओं की मौजूदगी माहौल में उत्साह का संचार कर रही थी, वहीं "प्यार का पंचनामा: यूथ और कैंपस" सत्र में गर्मागरम चर्चा ने भी लोगों को बहुत आकर्षित किया। सत्र का संचालन निष्ठा गौतम ने किया। इस सत्र में हिंदी के युवा लेखक क्षितिज रॉय, नीलिमा चौहान, दिव्य प्रकाश दुबे और सौरभ द्धिवेदी ने शिरकत की। आज के साहित्य में यूथ, कैंपस, बदलती भाषा, लिंग, प्यार को किस प्रकार रखा जा रहा है, इस पर इन युवा लेखकों ने अपनी बात रखी। इन दिनों अपनी किताब गन्दी बात के लिए चर्चित लेखक क्षितिज रॉय ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय आने के बाद मैं कई आज़ाद ख्याल लड़कियों से मिला। उनकी बातें और किस्से मेरे दिमाग में थे। इन्ही अनुभवों से प्रेरित होकर मैंने अपने किरदारों को गढ़ा।
भाषा में अनुवाद की महत्ता पर केंद्रित सत्र "अनुवाद भाषाओं के आर-पार" विषय पर मीरा जोहरी, पंकज चतुर्वेदी और मनीषा चौधरी से नीता गुप्ता ने बातचीत की। पंकज चतुर्वेदी ने इस मौके पर बोलते हुए कहा कि अनुवाद केवल भाषा से भाषा का ही करना नहीं होता बल्कि अनुवाद में भावनाओं को भी स्थान देना होता है।
दोपहर बाद के सत्रों  में "सत्ता का धर्म और धर्म की सत्ता" विषय पर पत्रकार पाणिनि आनंद से बातचीत में लेखक शाज़ी ज़मां ने कहा कि अकबर ने धर्म की सत्ता को सीधी चुनौती दी। इसके अलावा, उनके जीवन का एक सन्देश हमेशा प्रासंगिक रहेगा। उन्होंने अपने समय की लगभग सभी वैचारिक और धार्मिक धाराओं को एक मंच पर लाने की कोशिश की।
अपने आप में अनोखा सत्र "हिंदी कैसी दिखती है" विषय पर रहा। इस सत्र में तृषा गुप्ता, इरफ़ान, राजीव प्रकाश खरे और शीराज़ हुसैन से शैलेश भारतवासी से बातचीत की। इसमे  भाग लेने वाले सभी वक्ता चित्रकार, टीवी एंकर, अंग्रेजी पत्रकार और पब्लिशिंग जैसे भिन्न क्षेत्रों से थे, जो हिंदी को अपने अपने तरीके से लिख पढ़ रहे हैं। इसके बाद कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया जिसमे अरुण जैमनी और विनय विश्वास ने अपनी कवितायेँ पेश की। कार्यक्रम के अंत में साहित्य प्रेमियों ने पियूष मिश्र के कविता पाठ का आनंद लिया।


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Akshaya Gaurav

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