नई दिल्ली। साहित्य अकादमी में पारमिता शतपथी की किताब "पाप और अन्य कहानियाँ" का लोकापर्ण  मैनेजर पांडे, अल्पना मिश्र, अनामिका तथा अशोक माहेश्वरी द्वारा किया गया।
यह किताब राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गयी है। 10-11 साल के बच्चे पर केंद्रित यह किताब जिसमे वह भूख के मारे एक मुर्गी को मार देता है और परिणामस्वरूप अपने पुरे परिवार को मौत तक पंहुचा देता है, एक स्तब्धकारी वृतांत है। कहानी का सिर्फ अंत ही नहीं जहाँ अपनी माँ और बहनो की मृत्यु की जवाबदेही वह बच्चा महसूस करता है, वहीं भूख और गरीबी के विवरणों से भी यह कहानी आतंकित करती है।
पारमिता शतपथी चर्चित कथाकार हैं "पाप और अन्य कहानियाँ" में उनकी कुछ कहानियाँ शामिल हैं जिन्हें उनके संवेदना और समाज की गहरी समझ के लिये जाना गया है। पारमिता के कहानी संग्रह में समाज के वंचित दुर्बल लोगों  का पक्ष लेते हुए वो साफ़ दिखाई देती हैं और खाये पिए अघाये लोगों के प्रति उनकी घृणा भी स्पष्ट दृष्टि गोचर होती है। मसलन "दलाल" कहानी में उन्होंने नायक को शुरू से अंत तक वह आदमी कहकर ही संबोधित किया है, उसे कोई नाम तक नहीं दिया। राजेंद्र प्रसाद मिश्र द्वारा मूल ओड़िया से अनूदित इन कहानियों को पढ़ते हुए ऐसा नहीं लगता की अनुवाद पढ़ रहे हैं।
उल्लेखनीय यह है की वे आधुनिक समाज के निम्न तबके के दुःख तकलीफो के साथ मध्य वर्ग के उथलेपन की भी गहरी समझ रखती है। दलाल ऐसी ही कहानी है जिसमे एक व्यक्ति अपने सामान्य चालाकियों से अकूत सम्पति अर्जित करता है लेकिन अंत में एक चतुर लड़की के हाथों ठगा जाता है।

पारमिता शतपथी परिचय -

जवाहर लाल विश्व विद्यालय से अर्थशास्त्र में एम फिल कमिश्नर इनकम टैक्स के रूप में दिल्ली में कार्यरत पारमिता शतपथी पिछले पचीस वर्ष से लेखन में है और अब तक 7 कहानी संग्रह, दो उपन्यास ओड़िया भाषा में प्रकाशित हो चुके है। एक काव्य संग्रह प्रकाशनाधीन तथा अंग्रेजी में अनूदित कहानी संग्रह "दूर के पहाड़" वर्ष 2007 में एवं "चन्दन के फूल" वर्ष 2015  में प्रकाशित हुए, अनेक चर्चित कहानिया हिंदी अंग्रेजी तेलगु और गुजरती में अनूदित एवं इंडियन लिटरेचर म्यूज़ इंडिया समकालीन भारतीय साहित्य ,शब्दयोग, नया ज्ञानोदय, हंस, वागर्थ, जनसत्ता, अक्षरा, विपुला (तेलगु ) भाषा बंधन (बंगला) जैसी पत्र-पत्रिकाओं व वेब साइट में प्रकाशित हो चुकी हैं।
ओड़िया कहानी संग्रह "प्राप्ति" के लिए वर्ष 2016 के केंद्रीय साहित्य अकादमी, नई दिल्ली से पुरस्कृत हो चुकी है। ओड़िशा राज्य साहित्य अकादमी, भारतीय भाषा परिषद (कोलकता ), जी रथ फाउंडेशन (ओड़िशा) आदि की तरफ से पुरस्कृत व सम्मानित किया जा चुका हैं।


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Akshaya Gaurav

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