जयकार नहीं करता
प्रतिकार नहीं करता
कवि हूँ, मैं मतवाला
छुपकर वार नहीं करता

जयकार नहीं करता
प्रतिकार नहीं करता।

छुरा नहीं है, हाथों में
ज़ेब न कोई ख़ंजर है
पाँव हैं मेरे दुर्बल से
रण से, इंकार नहीं करता

जयकार नहीं करता
प्रतिकार नहीं करता।

धनबल ना मेरे करतल हैं
शक्ति भरा ना, प्रबल शरीर
लेखनी मेरी श्याम भरी
मिथ्या का विस्तार नहीं करता

जयकार नहीं करता
प्रतिकार नहीं करता।

अमरत्व नहीं,वरदान मिला
मिला दान, जीवन अवशेष
आँख दिखाये मृत्यु मुझे 
कलमवीर हूँ ! भय से
पराजय स्वीकार नहीं करता

जयकार नहीं करता
प्रतिकार नहीं करता।

तरकश में हैं, शब्द भरे
वाक्य बनें हैं, धनुष मेरे
पृष्ठ बनें, प्रत्यंचा के तल
शस्त्र अहित के, साथ नहीं रखता

जयकार नहीं करता
प्रतिकार नहीं करता।

भेदता हूँ, लक्ष्य कई
इन शब्दों से
रक्त नहीं, उत्पात नहीं
संहार नहीं करता

जयकार नहीं करता
प्रतिकार नहीं करता।


ध्रुव सिंह एक युवा कवि व ब्लॉगर है अौर 'एकल्वय' नाम से ब्लॉग लिखते है। आपसे E-Mail : dhruvsinghvns@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है।

© उपरोक्त रचना के सर्वाधिकार लेखक एवं अक्षय गौरव पत्रिका पत्रिका के पास सुरक्षित है।


Axact

Akshaya Gaurav

hindi sahitya, hindi literature, hindi stories, hindi poems, hindi poetry, motivational stories, inspirational stories, हिन्दी साहित्य, कहानियाँ, हिन्दी कविताएँ, काव्य, प्रेरक कहानियाँ, प्रेरक कहानियाँ, व्यंग्य.

loading...

POST A COMMENT :