मैं आज भी जंजीरों से जकड़ी हुयी,
कल तक सिमटी थी अंग्रेजों के क्रूर बंधन से,
आज जल रही हूँ आरक्षण, लूट, भ्रष्टाचार और दंगो से।
॥ मैं भारत माँ हूँ ॥

मेरी आँसूओं को देख, मेरे बेटों ने,
आजाद कराया, अंग्रेजों के क्रूर बंधन से,
तड़प रही हूँ, अपने उन सपूतों की याद में,
कौन बनेगा मेरा, आज तारनहार,
आज असहाय सा, मैं; बुत बनी खड़ी हूँ।
॥ मैं भारत माँ हूँ ॥

 कब आयेगा फिर; गाँधी, नेहरू, सुभाष, भगत,
कब आयेगा आजाद, बिस्मिल, टैगोर, तिलक,
कब होगा मेरा, आँचल गुलजार,
कब खिलेंगी कलियाँ,
कब आयेगी अब; खेतों में बहार।
॥ मैं भारत माँ हूँ ॥

मैं अपनी बेटीयों को आँचल में छुपा लेती थी,
आज मेरे आँचल में,
भ्रष्ट नेता, अपराधी और धर्म के झूठे लोग छुप गये हैं,
कहाँ छुपाउँ मैं अपने उन लाडले बेटे और बेटीयों को,
कब आयेगा फिर कृष्ण, राम, मोहम्मद, बुद्ध,
कब आयेगा महावीर, साईं, और यीशु ।
॥ मैं भारत माँ हूँ ॥


लेखक अक्षय गौरव पत्रिका के प्रधान संपादक है अौर आप सामाजिक, साहित्यिक तथा शैक्षिक परिवेश पर लेखन करते हैं। आपसे E-Mail : asheesh_kamal@yahoo.in पर सम्पर्क किया जा सकता है।

© उपरोक्त रचना के सर्वाधिकार लेखक एवं अक्षय गौरव पत्रिका पत्रिका के पास सुरक्षित है।



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Akshaya Gaurav

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