मेरी धड़कनों को तुम अपने सिने में लगा लो,
मेरी साँसो में तुम अपनी साँसो को बसा लो।
मेरी जिंदगी तुम्हारी अमानत है,
मेरी खुशी को तुम अपनी खुशियाँ बना लो।
करूंगा सजदा मैं तुम्हारी मुहब्बत का,
मेरे चेहरे पर खुशी का, अब तिलक तुम लगा दो।

तुम्हारे सिने में प्यार अपरंपार है,
और तुम्हारी आँखो में स्नेह भी अपार है।
मचलती रहे हँसी तुम्हारी गुलाबी लबों पर,
और मेरे सिने में, धड़कता तुम्हारा ही प्यार है।
ऐ जान, वजूद नहीं मेरा, तुम्हारे बिना,
मेरी रूह पर भी अब तेरा ही एख्तियार है।

तुम ही मेरी जिंदगी हो और तुम ही मेरी दुल्हन,
तुमसे हूँ मैं जिन्दा और तुम ही मेरी धड़कन।
ऐ मेरी खुशी;
तुम्हारे होठ और तुम्हारे नयन,
तुम्हारे दिल की हर धड़कन,
तुम्हारी जिंदगी, तुम्हारी सादगी,
तुम्हारी खुशी और तुम्हारी हँसी,
मेरी जिंदगी इन सब पर निसार है।

तुम मेरी रूह हो तुम हो मेरी शुकून,
तुम मेरी साँस हो और तुम ही जुनून,
तुम मेरी जज्बात हो तुम हो मेरी अल्फाज,
तुम से हूँ जिन्दा और तुम ही मेरी हमराज,
ऐ मेरे हमसफर,
अब तुम्हें बना कर रखुँगा अपने साँसो का सरताज।

तुम्हारे चेहरे का नूर मेरे दिल का शूरूर है,
तुम्हारे माथे का सिन्दुर मेरे नाम का गुरूर है।
मै तुम्हारे बाँहो में सिमटा रहूँ तुम्हारे सिने से लग कर,
तुम्हारे लबों को चुमता रहूँ तुम्हारा साजन बन कर।

तुम मेरी खुशी बन मुस्कुराती रहो,
तुम मेरी सजनी बन मेरी जिंदगी को सजाती रहो,
क्योंकि;
अब मेरी जिंदगी पर ऐ जान,
तुम्हारा ही अधिकार है,
और मेरा जीवन भी तुमही पर निसार है।
मेरी धड़कनों को तुम अपने सिने में लगा लो,
मेरी साँसो में तुम अपनी साँसो को बसा लो।


लेखक अक्षय गौरव पत्रिका के प्रधान संपादक है अौर आप सामाजिक, साहित्यिक तथा शैक्षिक परिवेश पर लेखन करते हैं। आपसे E-Mail : asheesh_kamal@yahoo.in पर सम्पर्क किया जा सकता है।

© उपरोक्त रचना के सर्वाधिकार लेखक एवं अक्षय गौरव पत्रिका पत्रिका के पास सुरक्षित है।


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Akshaya Gaurav

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