इंडियन पब्लिक लाइब्रेरीज़ कांफ्रेंस (आईपीएलसी) का लक्ष्य पुस्तकालयों को जीवंत बनाना है

नई दिल्ली : इंडियन पब्लिक लाइब्रेरी मूवमेंट (आईपीएलएम) और नास्कॉम फाउंडेशन द्वारा तीसरी इंडियन पब्लिक लाइब्रेरीज़ कांफ्रेंस का आयोजन 3-5 अक्टूबर को लोधी रोड स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में किया जायेगा। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री डॉ. महेश शर्मा इस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। सम्मेलन में सार्वजनिक पुस्तकालयों से जुड़े 400 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे। इनमें पुस्तकालय कर्मी, नीति निर्माता, योजनाकार, कॉर्पोरेट फाउंडेशन के प्रतिनिधि, पुस्तकालय व सूचना विज्ञान के छात्र तथा देश-विदेश के चुनिन्दा प्रतिनिधि भी शामिल हैं।
भारतीय जन पुस्तकालय अभियान (आईपीएलएम), बिल एवं मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की वैश्विक पुस्तकालय पहल के सहयोग से भारत में शुरू हुआ अभियान है। यह अभियान सार्वजनिक पुस्तकालयों को जीवंत और समाज के हर वर्ग के लिए उपयोगी संस्थानों में बदलने की दिशा में प्रयासरत है। भारतीय सार्वजनिक पुस्तकालय सम्मेलन इस अभियान की एक सालाना गतिविधि है, जिसमें सार्वजनिक पुस्तकालयों की चुनौतियों, अवसरों और इन पुस्तकालयों में दी जा रही नयी सेवाओं के बारे में चर्चा करने के लिए देश-विदेश के प्रतिनिधि हिस्सा लेते हैं।
इस अभियान के बारे में जानकारी देते हुए नास्कॉम फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीकांत सिन्हा ने कहा, “भारतीय जन पुस्तकालय अभियान हमारे दिलों के करीब है। इसके पीछे सोच यह है कि भारत में सार्वजानिक पुस्तकालयों की स्थिति पर गहन विचार-विमर्श किया जाये और लोगों की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए इन पुस्तकालयों में नए कार्यक्रम शरू हों। हमारा मानना है की सार्वजनिक पुस्तकालय ज्ञान प्राप्त करने का एक ऐसा स्रोत होना चाहिए जिसके ज़रिये इस देश का हर तबका बिना भेदभाव के ज्ञान और सूचना प्राप्त कर सकने में समर्थ होना चाहिए।”
अभियान द्वारा हर साल आयोजित किये जाने वाले सम्मलेन के सन्दर्भ में बताते हुए भारतीय लोक पुस्तकालय अभियान की कार्यकारी निदेशक डॉ. शुभांगी शर्मा ने इसे इस साल का बदलते समय में सूचना और ज्ञान प्राप्त करने के एक महत्वपूर्ण संसथान के पुनर्जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा, “इस बार सम्मेलन का फोकस उन लोगों को इन पुस्तकालयों से जोड़ने के प्रयास पर रहेगा जो अब तक इनका फायदा उठाने में सफ़ल नहीं हो पाए हैं। कारण कई हो सकते हैं। पिछले दो सम्मेलनों में सार्वजनिक पुस्तकालयों के भविष्य और प्रौद्योगिकी तथा नयी सामग्री, सेवाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से सार्वजनिक पुस्तकालयों को जीवंत बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया था। पिछले दोनों सम्मेलनों की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए, तीसरे सम्मेलन के विभिन्न सत्रों का मकसद यह होगा की कैसे पुस्कालय नॉलेज सोसाइटी के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाए ताकि हमारा देश एक शिक्षित और सूचित अर्थव्यवस्था के रूप में उभरे।
सम्मेलन में सार्वजनिक पुस्तकालय की क्षमताओं  और संभावनाओं पर एक पैनल चर्चा होगी, जिसमें दुनिया भर में पुस्तकालयों किये जा रहे नए प्रयोगों पर बात होगी। एक अन्य चर्चा सत्र, भारत में सार्वजनिक पुस्तकालयों के लिए वित्त की व्यवस्था पर केंद्रित होगा ताकि वे नये युग की ज़रूरतों के हिसाब से स्वयं को तैयार कर सकें। सरकारी सेवाओं और कार्यक्रमों को जनसामान्य तक पहुंचाने में सार्वजनिक पुस्तकालयों की भूमिका पर भी एक चर्चा सत्र होगा। इसमें विचार होगा कि कैसे लोक पुस्तकालयों के ज़रिए सरकारी सेवाओं को समाज के सबसे निचले स्तर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है, ताकि देश में समानता और सबको साथ लेकर चलने का सपना पूरा हो सके। एक विशेष सत्र में, नीति निर्माता इस बारे में बात करेंगे कि इन संस्थाओं को पुनर्जीवित के लिए किस तरह की नीतियां आवश्यक हैं।
सम्मेलन के तीसरे दिन सार्वजनिक पुस्तकालयों में कार्य कर रहे पुस्तकालय कर्मियों की क्षमताओं के विकास के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जायेंगी।
कार्यक्रमः 3-5 अक्टूबर 2017
स्थानः इंडिया हैबिटेट सेंटर, लोधी रोड, नई दिल्ली
प्रवेशः निमंत्रण द्वारा
अधिक जानकारी के लिएः www.iplc.in

इंडियन पब्लिक लाइब्रेरी मूवमेंट (आईपीएलएम) के बारे में:

आईपीएलएम की कोशिश है कि पुस्तकालय कर्मियों का कौशल बढ़ाकर और टैक्नोलॉजी के ज़रिये सूचना संसाधनों में वृद्धि करके, सार्वजनिक पुस्तकालयों को सामाजिक रूप से समावेशी और समुदाय उन्मुख बनाकर ज्ञान केन्द्रों के रूप में विकसित किया जा सके। आवश्यकता-आधारित सूचना, संसाधनों और सेवाओं की पूरी श्रृंखला के साथ, जो नागरिकों के जीवन और उनकी आजीविका पर असर डाल सकें, इस परियोजना का उद्देश्य वर्ष 2030 तक सार्वजनिक पुस्तकालयों को ‘परिवर्तन का एजेंट’ और ‘विकास का इंजन’ बनाना है।


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Akshaya Gaurav

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