किसी की भी निगाह में मैं अब खुदा नहीं रहा
अब तो मुझे भी गुनाह की इजाज़त मिलनी चाहिए

उम्र की दहलीज पर वो अब भी एक बच्ची है
उसकी हरकतों को कुछ नई सी शरारत मिलनी चाहिए

आवाम कब तक यूँ ही कठपुतली सी तमाशा देखेगी
सिम्त जज़्बातों को कभी न कभी बगावत मिलनी चाहिए

बहुत देर पोशीदा रही मेरे ख़्वाबों की रंगीन ताबीरें
मेरी निगाहों को भी तस्वीरे-हुश्न
कयामत मिलनी चाहिए

तुम्हारे हाथों में सौप दी हैं हम सबने अपनी तकदीरें
हर हाल में हमें मुल्क की सूरत सलामत मिलनी चाहिए

मसला क्यों न कोई  भी हो मंदिर या मस्जिद का
इंसानों के दिल में हर घड़ी ज़िन्दा मोहब्बत मिलनी चाहिए





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Akshaya Gaurav

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