‘गाँधी: राजनीति और नैतिकता’ राजकमल प्रकाशन समूह के 68वें स्थापना दिवस पर व्याख्यान

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नई दिल्ली। राजकमल प्रकाशन समूह के 68वें स्थापना दिवस के अवसर पर आज कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ़ इंडिया में सुप्रसिद्ध इतिहासकार सुधीर चंद्र द्वारा ‘गाँधी: राजनीति और नैतिकता’ पर व्याख्यान हुआ। 1947 में स्थापित राजकमल प्रकाशन समूह हिंदी का दिग्गज प्रकाशक माना जाता है। हिंदी भाषा के कई सर्वश्रेष्ठ लेख और और लेखकों का राजकमल प्रकाशन समूह से सम्बन्ध रहा है। इस अवसर पर नामवर सिंह, केदारनाथ सिंह, ज्ञानेंद्रपति तथा राजकमल प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अशोक माहेश्वरी भी मौजूद थे।
68वें स्थापना दिवस पर ‘राजकमल पाठकमित्र सम्मान’ भी दिया गया और यह सम्मान राजकमल प्रकाशन के कर्मचारी लालाजी और रामजी को दिया गया,जो कि कई सालों से इस प्रकाशन समूह से जुड़े हुए हैं।
सुप्रसिद्ध इतिहासकार सुधीर चन्द्र ने ‘गाँधी: राजनीति और नैतिकता’ पर व्याख्यान पर बोलते हुए कहा “जिस तरह हमारी दुनिया में हिंसा बढती जा रही है, गांधी की प्रासंगिकता पहले से भी ज्यादा हो गयी है। लेकिन विडम्बना ये है कि गांधी की सम्भावना अब लगातार घटती जा रही है।”
इस मौके पर केदारनाथ सिंह ने कहा “राजकमल प्रकाशन को हिंदी का बहुत ही महत्वपूर्ण संस्थान मानता हूँ। पिछले साठ से अधिक वर्षों में हिंदी और भारतीय भाषाओँ में जो महत्वपूर्ण लिखा जाता है वह सब राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है। यह आकार किसी भी और प्रकाशन का नहीं है। नई व्यवस्था में यह संभव हुआ है। मैं राजकमल के इस नए अभियान का स्वागत करता हूँ।”
ज्ञानेंद्रपति ने अवसर पर कहा “आलोक-स्तम्भ न भी हों, पटना के छात्र-जीवन में मेरे लिए लैम्प-पोस्ट की मद्धिम आत्मीय रोशनी का मानवीय पर्याय रहे हैं राजकमल प्रकाशन के लालाजी, जिनके उजागर स्नेह-वृत में झुककर किताबों को पढ़ने और जीवन को धन्य करने वाले जीवन-व्यापी पुस्तक-प्रेम में पड़ने का सौभाग्य हासिल हुआ उन्हीं लालाजी के पुस्तक- पोढाय हाथों के लिए यह कविता कृतज्ञतापूर्वक, श्रद्धापूर्वक।”
इस अवसर पर राजकमल प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अशोक माहेश्वरी ने कहा “आज के समय की प्रासंगिता को परिभाषित करने का सबसे सशक्त माध्यम  किताब है। किताब से अपने समय को परिभाषित करना भी है इसमें गाँधी जी से सहायक कोई नहीं हो सकता। यह वर्ष चंपारण सत्याग्रह के 100वे वर्षगांठ का भी है। इस अवसर पर हमने राजकमल प्रकाशन स्थापना दिवस के लिए सुधीर चंद्र जी जो की प्रसिद्ध इतिहासकार और गांधीवादी चिंतक हैं को आमंत्रित किया है। व्यख्यान का विषय गाँधी : राजनीति और नैतिकता है। राजकमल प्रकाशन अपने 70 वे वर्ष की ओर बढ़ रहा है हमारी यह यात्रा अपने सहयोगियों के बिना संभव नहीं थी। इसी वर्ष राजकमल की पटना शाखा को भी 60 वर्ष पुरे हुए हैं इस उपलक्ष्य में एक भव्य आयोजन भी हम करने जा रहे हैं, जिसमे बिहार के वरिष्ठ लेखको  की पुस्तके जारी होंगी और साथ ही हम एक पुस्तक यात्रा निकालेंगे जो की पटना से पूर्णिया तक जाएगी जिसमे हम दिनकर, नागार्जुन के गांव होते हुए रेणु के गांव तक पहुचेंगे।


prachi

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