विश्व पुस्तक मेले में राजकमल प्रकाशन द्धारा 24 किताबों का लोकापर्ण

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किताबों का महाकुम्भ विश्व पुस्तक मेला  आज से प्रगति मैदान में शुरू हो गया है। प्रत्येक वर्ष की तरह राजकमल प्रकाशन समूह पुस्तक प्रेमियों के लिए 24 नई किताबे लेकर आया है। प्रगति मैदान में हॉल 12, 12 ए में स्टाल 303 से 318 तक आप राजकमल के किताबों का लुप्त उठा सकते हैं।
राजकमल प्रकाशन की ओर से पुस्तक मेले में ख़ास और आम हर तरह के पाठकों के लिए कई खास सौगात हैं। उपन्यास, संस्मरण, कहानी-संग्रह, कविता संग्रह, नाटक से लेकर कुछ और कथेतर विधाओं में स्थापित और नए लेखकों की पठनीय किताबें मेले में प्रमुखता से हैं। साथ में वर्षों से पाठकों के बीच ज्यादा मांग में रहने वाली अनेक पुरानी किताबें भी नए संग्रहणीय कलेवर, नई सज-धज में सामने आयी है।

आपको बताते चलें कि इस बार मेले में शाज़ी ज़माँ का उपन्यास ‘अकबर’ भी है जो बाजार में आने से पहले से ही चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह 20 सालों की छानबीन के बाद लिखा गया अपने ढंग का अनूठा उपन्यास है जो इतिहास के प्राथमिक स्रोतों और दुर्लभ दस्तावेजों से निकली सचाई को सामने लेकर आता है।
यशस्वी कथाकार एवं ‘हंस’  पत्रिका के सम्पादक रहे राजेन्द्र यादव का व्यक्तित्व हिंदी साहित्य संसार के अन्दर और बाहर हमेशा कई तरह से कई वजहों से चर्चा और कुचर्चा दोनों का विषय बना रहा है, लेकिन राजेन्द्र जी की शख्सियत हिंदी की प्रतिष्ठा बढाने वाली ही बनी रही और आज भी है। उन्होंने लेखन ही नहीं किया, बतौर सम्पादक कई उम्दा लेखकों की खोज की और उन्हें स्थापित किया। वैसे ही लेखकों में से एक नाम हैं- मैत्रेयी पुष्पा। उन्होंने राजेन्द्र जी पर अपने संस्मरणों की किताब लिखी है- ‘वो सफ़र था कि मुकाम था’।  इसमें उनकी नजर से देखे गए राजेन्द्र जी कुछ अलग छवि में ही दिखाई देंगे। यह किताब राजेन्द्र जी को समझने के लिए जरूरी बन पड़ी है। कभी राजकमल प्रकाशन में सम्पादक रहे चर्चित पत्रकार और कथाकार धीरेन्द्र अस्थाना की आत्मकथा ‘जिंदगी का क्या किया’  राजकमल से ही प्रकाशित होकर मेले में आई है।

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सुप्रसिद्ध कथाकार कृष्णा सोबती का बहुप्रतीक्षित उपन्यास ‘पाकिस्तान गुजरात से हिंदुस्तान गुजरात’भी 2017 की एक उपलब्धि होने वाली है। मेले में पाठक इस आत्मकथात्मक कलेवर वाले उपन्यास को खरीद सकेंगे।
फिल्म और साहित्य की दुनिया में समान रूप से मशहूर कथाकार ख्वाजा अहमद अब्बास की चुनिन्दा कहानियों का एक विशेष संग्रह ‘मुझे कुछ कहना है’मेले में राजकमल स्टॉल का  विशेष आकर्षण है। पाठकप्रिय कथाकार शिवमूर्ति का नया कहानी संग्रह ‘कुच्ची का कानून’स्त्री के अपने कोख के अधिकार के सवाल को सामने ले आने वाला है। इसमें कुछ और बेहद पठनीय कहानियां शामिल हैं। सुपरिचित कथाकार अल्पना मिश्र का नया कहानी संग्रह ‘स्याही में सुर्खाब के पंख’भी पाठकों को लुभाएगा।
ऑस्कर पुरस्कार से सम्मानित गीतकार, शायर, पटकथा लेखक गुलज़ार की राधाकृष्ण से प्रकाशित मंज़रनामा सीरिज में 6 से अधिक नई किताबें मेले में बड़ा आकर्षण हैं।
राजकमल की बहुप्रशंसित और व्यापक रूप से स्वीकृत दो पुस्तक श्रृंखलाएं हैं- ‘प्रतिनिधि कविता’और ‘प्रतिनिधि कहानी’। प्रतिनिधि कविता सीरिज में दो कवियों विष्णु खरे और मंगलेश डबराल की किताबें इस मेले में शामिल हो रही हैं। इसी तरह प्रतिनिधि कहानी सीरिज में हृषिकेश सुलभ की किताब आई है।
मेले के अंतिम दिनों में प्रभात त्रिपाठी, आनन्द हर्षुल और पंकज मित्र के उपन्यास आने की सम्भावना है। मशहूर बांगला यात्री लेखक बिमल डे का नया यात्रा वृतांत भी लोकभारती से छप कर आ रहा है। साथ में इसी प्रकाशन से कई टेलीविजन धारावाहिकों की लेखिका अचला नागर का नया उपन्यास ‘छल’भी छप कर आ रहा है। 9 हिंदी कवियों के नए पठनीय काव्य संग्रह मेले में राजकमल समूह के स्टाल पर कविता प्रेमियों के लिए बड़ा आकर्षण हो सकते हैं।

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शहर के इश्क़ और इश्क़ में राजनीति या कि 2013 के विकट राजनीतिक समय में प्रेम का किस्सा बखानता क्षितिज रॉय का उपन्यास ‘गंदी बात’राधाकृष्ण प्रकाशन के उपक्रम ‘फंडा’ से प्रकाशित होकर सीधे मेले में आएगी। फ़िलहाल इसकी प्री बुकिंग अमेज़न पर चल रही है और यह सोशल मीडिया पर युवाओं के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
हिन्दी साहित्य की उत्कृष्ट किताबों के साथ-साथ अन्य विधाओं की आकर्षक किताबें लाने के अपने पिछले साल के वादों को पूरा करता राजकमल प्रकाशन समूह इस साल ‘विश्व पुस्तक मेला- 2016’ में सिनेमा, इतिहास, आदिवासी साहित्य, खेल, और यात्रा-वृतान्त की पाठकप्रिय और मनोरंजक किताबों के साथ मेलें में सिरकत करने वाला है।


prachi

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