छठी माँ से माँगते हैं, पुत्र-वैभव और सुहाग-रत्न

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छठी माँ से माँगते हैं, पुत्र-वैभव और सुहाग-रत्न
सूर्य देव की उपासना, छठी माँ की अर्चना,
व्रतियों की आराधना, एवं पवित्र है जिसकी कामना,
पूर्ण करती, छठी माँ, उन सभी की मनोकामना।
सूर्यास्त के अर्घ्य में, माँगते जिंदगी एवं खुशी,
और करते हैं व्रती, शुभ-मंगल के लिए प्रार्थना।
रात्रि के प्रहर में, सजता है छठी माँ का,
प्यारा सा दरबार, आते हैं; आशीष माँगने,
राजा, रंक और विश्व के पालनहार।
उदीयमान का अर्घ्य होता है महत्वपूर्ण,
छठी माँ से माँगते हैं, पुत्र-वैभव और सुहाग-रत्न।
सँपूर्ण होता है व्रतियों की आराधना,
छ्ठी माँ मनोवाँछित फल देती हैं, और;
करती हैं पूर्ण; सबकी मनोकामना।


लेखक अक्षय गौरव पत्रिका के प्रधान संपादक है अौर आप सामाजिक, साहित्यिक तथा शैक्षिक परिवेश पर लेखन करते हैं। आपसे E-Mail : asheesh_kamal@yahoo.in पर सम्पर्क किया जा सकता है।

© उपरोक्त रचना के सर्वाधिकार लेखक एवं अक्षय गौरव पत्रिका पत्रिका के पास सुरक्षित है।

prachi

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