तुम्हें इतनी फुरसत से है बनाया गया

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मेरे लिये ही धरती पर तुम्हें, है भेजा गया,
इसलिये, तुम्हें इतनी फुरसत से, है बनाया गया ।

चेहरे को तुम्हारी चाँदनी से,
होठों को,सुर्योदय की पहली किरण से, हैलिया गया,
इसलिये, तुम्हें; इतनी फुरसत से, है बनाया गया ।

तेरे गेसूओं को बादल से,
तेरे नयनों में प्यार का, अमृत है डाला गया,
इसलिये, तुम्हें; इतनी फुरसत से, है बनाया गया ।

तुम्हारे होठों पर, मुस्कान सितारों से,
तुम्हारे मन को, बहारों से,
तुम्हारे दिल मेंसिर्फ,मुझे ही सजाया गया,
इसलिये, तुम्हें; इतनी फुरसत से, है बनाया गया ।

तुम्हारे माथे की बिंदी, जैसे आँसमा में है चाँद,
नजरें उठे तो दिन, झुके तो रात,
तुम्हारेकाया को संगमरमर से,है ढाला गया,
इसलिये, तुम्हें; इतनी फुरसत से, है बनाया गया ।

तुम्हारे होठों पर, मुस्कान रहे,
कोमल ह्रदय का, सम्मान रहे,
तुम्हारे लिए ही मोहब्बत, मेरे दिल मेंहैडाला गया,
इसलिये, मुझे;तुम्हारे लिए, ही बनायागया।

जब रखे तू कदम, मन आँगन में,
तुम्हें सोलह श्र्ंगार से भी है,सजाया गया,
इसलिये, तुम्हें; इतनी फुरसत से, है बनाया गया।

©आशीष कमल 

आशीष कमल
सहायक पुस्तकाल्याध्यक्ष व लेखक
योजना तथा वास्तुकला विद्यालय,
विजयवाड़ा, आन्ध्र प्रदेश
E-mail- asheesh_kamal@yahoo.in


prachi

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