मैं तो खुशियों का पृष्ठ हूं

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ना भुला सकोगे तुम मुझे अपनी ख्वाबों से,
मैं तो जुगनू हूँ;
तुम्हें याद आउँगा चाँदनी की हसीन रातों में।

ना भुला सकोगे तुम मुझे अपनी यादों से,
मैं तो स्पर्श हुँ;
तुम्हें मेरा एहसास होगा अमावस्या के अँधेरी रातों में।

मैं तो आँसू हुँ, तुम्हारी पलकों से गिर जाउँगा,
लेकिन जब-जब तुम मुस्कुराओगे,
तुम्हारी मुस्कान बन, तुम्हें याद मैं आउँगा।

न मिटा सकोगे तुम मुझे अपनी जिंदगी के किताबों से,
मैं तो खुशीयों का पृष्ठ हुँ,
जुड़ जाउँगा तुम्हारी हर उन यादों से,
और;
जब-जब तुम लिखोगे वफाओं के शब्द,
मैं याद आउँगा तुम्हारे हर लफ्ज, हर तरानो में।


आशीष कमल
लेखक योजना तथा वास्तुकला विद्यालय, विजयवाड़ा,
आन्ध्र प्रदेश में सहायक पुस्तकाल्याध्यक्ष के पद पर
 कार्यरत हैं तथा अक्षय गौरव पत्रिका के उप-संपादक भी है।
E-Mail- asheesh_kamal@yahoo.in

© उपरोक्त रचना के सर्वाधिकार लेखक एवं अक्षय गौरव पत्रिका पत्रिका के पास सुरक्षित है।


prachi

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