रंगो में खुबसूरत है लाल

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रंगो में खुबसूरत है लाल,
और, जीवन का सौंदर्य है गुलाल।
मिलता है दिल को, तब करार,
जब खुशीयों में, संग रहे प्यार।
मन में रहे प्रित,
जब साथ रहे मनमित।
दिलवर हो यदि संग,
तो दिल में हमेशा रहे उमंग,
ताल से ताल मिले तो निकले सप्तरंग,
दिल से दिल का मिलन जो हो तो;
रंग से मिल जाये रंग।
सच हो जाये सपना,
जब मिल जाये कोइ अपना,
तो अच्छा लगता है। 



Asheesh Kamal.jpg

आशीष कमल
उप-संपादक
लेखक योजना तथा वास्तुकला विद्यालय, विजयवाड़ा,
आन्ध्र प्रदेश में सहायक पुस्तकाल्याध्यक्ष के पद पर
 कार्यरत हैं
E-Mail- asheesh_kamal@yahoo.in

© उपरोक्त रचना के सर्वाधिकार लेखक एवं अक्षय गौरव पत्रिका पत्रिका के पास सुरक्षित है।


prachi

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