वो ना आइ ना कोई खबर था

0
2

कोई है जो मेरे दिल में स्पंदन करता है,

मेरी आँखों के पलकों पर हमेशा रहता है।
वक्त की कमी कहो या किस्मत का फलसफा,
मोहब्बत की तपिश कहो या मिलने की इंतहा ।
उसकी हँसी मेरे होठों पर थिरकती है,
मेरी धड़कन उसकी सांसों से चलती है।
है यह रहस्य जिसे मैं समझा न पाया,
दिलाया यकिन उसे लेकिन कह न पाया ।
सजदा भी किया मैंने उसके मोहब्बत के वास्ते,
इजहार भी किया मैनें अपने वफा का, शब्दों के रास्ते ,
उसे समझ न आया, मेरी भावुक जज्बातें।
भेजा था उसे मैंने, सपनों की कश्ती सजा कर,
लौट आओ मेरी दुनिया में, खुशियों की पंख लगा कर।
रखूँगा तुम्हें अपने दिल-ए-आशीष के गुलिस्तां में सजाकर,
पर वो ना आइ ना कोई खबर था, पर वो ना आइ ना कोई खबर था।


Asheesh Kamal.jpg
आशीष कमल
उप-संपादक
लेखक योजना तथा वास्तुकला विद्यालय, विजयवाड़ा,
आन्ध्र प्रदेश में सहायक पुस्तकाल्याध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं
E-Mail- asheesh_kamal@yahoo.in
© उपरोक्त रचना के सर्वाधिकार लेखक एवं अक्षय गौरव पत्रिका पत्रिका के पास सुरक्षित है।
prachi

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here